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तपोभूमि पर तपने लगी सियासत, यहां पुरानी है अदावत

कोलायत : बीस साल से दो परिवार ही आमने-सामने, पार्टियों ने इस बार के चुनाव को बनाया विकास बनाम भ्रष्टाचार  

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 बीस साल से दो परिवार ही आमने-सामने

बीस साल से दो परिवार ही आमने-सामने

सांख्य दर्शन के प्रणेता कपिल मुनि की तपो स्थली कोलायत। यहां सरोवर किनारे ही उन्होंने सांख्य दर्शन की रचना की थी। इन दिनों यहां 'चुनावी सांख्यिकी' बैठाई जा रही है। जितनी पवित्र भूमि है, उतनी ही धन-धान्य यहां धरा है। पथरीली जमीन पर भले ही फसलें ज्यादा नहीं लहलहाती, लेकिन यहां व्हाइट क्ले और बजरी के अकूत भंडार हैं। कुछ क्षेत्र में जिप्सम और कोयला भी है। खनन, रॉयल्टी और सोलर हब वाले क्षेत्र से भले यहां के आम आदमी के हाथ कुछ खास नहीं लगा, लेकिन सरकारी खजाना भरने के साथ कइयों की आर्थिक समृदि्ध के नए द्वार खुले हैं। इस बार चुनाव में भी इनसे जुड़ा भ्रष्टाचार और गुंडा टैक्स ही सबसे बड़ा मुद्दा बताया जा रहा है। कांग्रेस जहां क्षेत्र में कराए विकास कार्यों को गिना रही है वहीं भाजपा पिछले पांच साल में यहां भ्रष्टाचार की खुली छूट का आरोप लगाते हुए नए चेहरे को मौका देने की बात कह रही है। विधानसभा चुनाव में यह हमेशा हॉट सीट रही है। इस बार भाजपा के यहां टिकट बदलने के बाद मुकाबला रोचक बन रहा है। कांग्रेस के कैबिनेट मंत्री भंवरसिंह भाटी का मुकाबला सात बार विधायक रहे देवीसिंह भाटी के पोते अंशुमान सिंह से हो रहा है। देवीसिंह भाटी परिवार की तीसरी पीढ़ी मैदान में है। अंशुमान के पिता महेंद्र सिंह बीकानेर से सांसद रहे थे।

2 बड़े फैक्टर

1. कांग्रेस छोड़ रालोपा में शामिल हुए वरिष्ठ नेता रेवंतराम पंवार ने भी यहां ताल ठोक रखी है। वे यहां कांग्रेस के समीकरण बिगाड़ रहे हैं। हालांकि उनसे मान-मनौव्वल जारी है।
2. उधर, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल और देवीसिंह भाटी की पिछले लोकसभा चुनाव से चली आ रही अदावत जगजाहिर है। इस चुनाव में मेघवाल का रुख भी काफी कुछ तय करेगा।


परिवार वही, बस चेहरे बदलते रहे

वर्ष 1962 में यह सीट अस्तित्व में आई थी। यहां पिछले बीस साल से दो परिवार ही आमने-सामने है। पहले दशक में रघुनाथ सिंह भाटी और देवीसिंह भाटी के बीच मुकाबला रहा। इसके अगले दशक में रघुनाथ सिंह के पुत्र भंवर सिंह भाटी के रूप में दूसरी पीढ़ी मैदान में आई। भंवर सिंह ने पहले देवी सिंह और फिर पिछले चुनाव में उनकी पुत्रवधु पूनम कंवर को हराया। इस बार दूसरी पीढ़ी का तीसरी पीढ़ी से मुकाबला है।

सबसे ज्यादा क्रिटिकल बूथ और असुरक्षित क्षेत्र यहीं पर
प्रशासन ने बीकानेर जिले में सबसे ज्यादा 114 क्रिटिकल बूथ और 31 असुरक्षित क्षेत्र इसी सीट पर चिह्नित किए हुए हैं। वहीं पिछले चुनाव में सबसे ज्यादा लॉ एंड ऑर्डर की 92 घटनाएं इसी विधानसभा क्षेत्र में हुई थी।


क्षेत्र के 3 प्रमुख मुद्दे

- पुष्कर की तर्ज पर हो कपिल सरोवर का विकास।
- कोलायत को नगरपालिका बनाया जाए।

- व्हाइट क्ले से बनने वाले उत्पादाें से जुड़े उद्योग विकसित हों।

प्रत्याशियों के 3 वादे
- विकास के मामले में प्रदेश की टॉप तहसील बनाएंगे।

- बाहरी नहीं, स्थानीय को रोजगार दिलवाएंगे।
- भ्रष्टाचार मुक्त कोलायत बनाएंगे।


2018 : विस चुनाव में कांग्रेस को 11 हजार वोट ज्यादा मिले

कुल मतदान : 179053 मत
मतदान प्रतिशत : 78.83 प्रतिशत

भंवर सिंह भाटी (कांग्रेस) को मिले: 89505 मत, 49.99%
पूनम कंवर भाटी (भाजपा) को मिले : 78489 मत, 43.84%

जीत का अंतर : 11016 मत

2019 : लोकसभा चुनाव में अंतर रहा 1794 वोट
कोलायत विस क्षेत्र में कुल मत पड़े : 119377

भाजपा के अर्जुनराम मेघवाल को मिले : 57625 मत
कांग्रेस के मदन गोपाल मेघवाल को मिले: 55831 मत

अंतर : 1794 मत