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हजार हवेलियों के शहर को लगी नजरंदाजी की नजर

ये हवेलियां कोरनी कला, बारीक नक्काशी, कलात्मक चित्रकारी, लकड़ी पर बारीक खुदाई कार्य के कारण अनूठी हैं। करीब सौ से चार सौ साल पुरानी ये हवेलियां शहर की विशिष्ट पहचान हैं।

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हजार हवेलियों के शहर को लगी नजरंदाजी की नजर

हजार हवेलियों के शहर को लगी नजरंदाजी की नजर

विमल छंगाणी
सोनलिया धोरों के बीच बसे बीकानेर शहर की कलात्मक एवं बेजोड़ हवेलियां ऐतिहासिक हैं। पुराने शहर के गली-मौहल्लों से चौक-चौराहों के पास, गंगाशहर, भीनासर आदि क्षेत्रों में स्थित हवेलियां लाल पत्थर पर की गई कलात्मक कोरनी व स्थापत्य कला के बेजोड़ नमूने हैं। ये हवेलियां कोरनी कला, बारीक नक्काशी, कलात्मक चित्रकारी, लकड़ी पर बारीक खुदाई कार्य के कारण अनूठी हैं। करीब सौ से चार सौ साल पुरानी ये हवेलियां शहर की विशिष्ट पहचान हैं। रियासतकाल से भीषण गर्मी, बारिश और लू के थपेड़ों और प्रतिकूल परिस्थितियों में सीना तान कर खड़ी रहने वाली हवेलियां आज अपनों के आगे दम तोड़ रही हैं। देख-रेख के अभाव, वर्षों से बंद रहने, मालिकों के बीकानेर से बाहर रहने, जर्जर होने और एक के बाद एक हवेली को तोड़कर उसके पत्थरों, गेट, जालियों, छत्तों आदि को बेचने से हवेलियां साल दर साल अब गायब होने लगी हैं।

100 से 400 साल पुरानी

हजार हवेलियों का शहर पुस्तक के लेखक डॉ. जिया उल हसन कादरी के अनुसार, शहर में स्थित हवेलियां 100 से 400 साल तक पुरानी हैं। अधिकतर हवेलिया 100 से 200 साल तक पुरानी हैं। 19 वीं शताब्दी में अधिकतर हवेलियों का निर्माण हुआ। कुछ हवेलियां ही 300 से 400 साल तक पुरानी हैं।

हर साल ध्वस्त हो रही हवेलियां

शहर में ऐतिहासिक धरोहर में शुमार हवेलियां साल दर साल ध्वस्त हो रही हैं। हवेलियों के वर्तमान मालिक इन हवेलियों को बेच रहे हैं अथवा कलात्मक हवेलियों को हटवाकर अन्य निर्माण करवा रहे हैं। शहर में हर साल दस से पन्द्रह हवेलियों के ध्वस्त होने की स्थिति बनी हुई है। पुरानी और जर्जर अवस्था में होने के कारण भी हवेलियों को हटाने का क्रम जारी है।

संरक्षण जरूरी

पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि शहर की हवेलियों को पर्यटन नक्शे में शामिल किया जाए। जो हवेलियां बंद हैं, उनके मालिकों से बातचीत कर खुलवाया जाए। सार-संभाल की व्यवस्था की जाए। आमजन व पर्यटक हवेलियों की भव्यता निहार सकें, ऐसी व्यवस्था की जाए। हवेलियों के मालिकों को प्रोत्साहित किया जाए।

कहां जा रहा है कलात्मक पत्थर व कीमती सामान

शहर में हर साल कई हवेलियों को तोड़ा जा रहा है। हर हवेली में बड़ी मात्रा में कलात्मक पत्थर, झरोखें, जालियां, गेट, बारियां, लकड़ी की छत्ते, सुनहरी कलम के कांच सहित कीमती सामान भी निकाला जा रहा है। शहर में हवेलियों का पत्थर व अन्य कीमती सामान नजर नहीं आ रहा है। हवेलियों को तोड़ने, सामान को बेचने और खरीदने के कार्य से कौन लोग जुड़े हुए हैं। सामान कहा जा रहा है। यह भी पता होना चाहिए।

विश्व प्रसिद्ध हैं हवेलियां

शहर में रामपुरिया परिवार, डागा परिवार, मोहता परिवार, ढड्ढा परिवार, कोठारी परिवार सहित विभिन्न जातियों व परिवारों की हवेलियां प्रसिद्ध हैं।