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Rajasthan News : अब, हत्या-रेप के मामलों को सुलझाना हुआ और आसान, इस जिले की पुलिस ने खुद बनाई फॉरेंसिक जांच टीम

जिले के प्रत्येक थाने से दो-दो सिपाहियों का चयन हुआ। पहले चरण में आठ जवानों का चयन क र तीन माह तक प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे चरण में सभी थानों से दो-दो जवानों को प्रशिक्षण दिया गया। जिले के महिला और साइबर थाने को छोड़कर 27 थानों के 54 जवानों को प्रशिक्षित किया गया।

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जयप्रकाश गहलोत

Bikaner News : बीकानेर. जिला पुलिस की कार्यशैली में गुणात्मक सुधार हुआ है। खास कर हत्या-बलात्कार जैसे मामलों में साक्ष्य संग्रहण के मामले में। इसका बहुत कुछ श्रेय बीकानेर पुलिस की पहल को जाता है, जिसने खुद की ही फॉरेंसिक टीम तैयार की है। यह टीम चोरी, मर्डर या बलात्कार की वारदात में मौके से साक्ष्य-सबूत जुटाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि परंपरागत रूप से फॉरेंसिक लैब से टीम आने से पहले सबूतों के नष्ट होने अथवा विकृत होने की स्थिति पर भी रोक लगेगी।बीकानेर पुलिस ने इसके लिए योग्य पुलिस जवानों को छांटा। उन्हें फॉरेंसिक एक्सपर्ट अधिकारियों से प्रशिक्षण दिलाकर दक्ष बनाया। जवानों को बीकानेर एवं जयपुर स्थित फोरेंसिक लैब के विशेषज्ञों ने तीन-तीन माह का गहन प्रशिक्षण दिया। पुलिस के जवानों की फॉरेंसिक टीम बनाने का पहला नवाचार बीकानेर पुलिस कर रही है। यह सफल रहा, तो इसे प्रदेशभर में भी अपनाया जा सकता है।

डिजिटल साक्ष्य के अलावा फुट प्रिंट की भी करेगी जांच
मोडुस ऑपरेंडी ब्यूरो (एमओबी) एवं मोबाइल इन्वेस्टिगेटिव यूनिट (एमआईयू) मिलकर घटनास्थल से सबूत इकट्ठा करने का काम करेंगी। अब तक फॉरेंसिक टीम ही यह काम करती आई है। अब यह टीमें डिजिटल एवं साइंटिफिक एविडेंस कलेक्ट करेंगी। साथ ही डिजिटल एविडेंस के अलावा फुट प्रिंट, फिंगर प्रिंट संग्रहीत करने का काम भी करेंगी। प्रत्येक थाने के दो-दो सिपाही एवं सीओ कार्यालय में तैनात एक-एक जवान को फॉरेंसिक काम के लिए प्रशिक्षित किया गया है, ताकि वे एमओबी-एमआईयू टीम के सहयोग में काम कर सकें। पुलिस की फॉरेंसिक टीम हार्डकोर व हिस्ट्रीशीटर के मामले में डिजिटल एविडेंस संग्रहीत करेगी। ऐसे अधिकारियों को सहयोग करेगी, जो डिजिटल एविडेंस कलेक्ट नहीं कर पाते हैं।

अब हैंड जोन में ट्रेनिंग चल रही है
पुलिस ने अपनी खुद की फॉरेंसिक टीम तैयार की है। 54 जवानों को जयपुर आरपीए में भेजकर ट्रेनिंग दी गई। जवानों को एफएसएल के टॉप लेवल जैसे, साइंटिफिक इन्वेस्टिगेशन, सीन्स ऑफ क्राइम एनालासिस, लिटिंग ऑफ एविडेन्स फ्राम सीन्स और क्राइम की ट्रेनिंग दी गई है। यह ट्रेनिंग अंतिम स्तर पर चल रही है, जिसे हैंड जोन ट्रेनिंग कहा जा सकता है। जून-जुलाई से पुलिस की खुद की फॉरेंसिक टीम तैयार होकर एफएसएल के साथ मिलकर काम करना शुरू कर देगी।- तेजस्वनी गौतम, पुलिस अधीक्षक

केस-एक
खाजूवाला के चक तीन केजेडी में तीन मई को हरविन्दर सिंह की सिर में कुल्हाड़ी से वार कर सगे भाई और भाभी ने हत्या कर दी। स्थानीय पुलिस खुद की फॉरेंसिक टीम के साथ पहुंची। एसएफएल टीम के आने से पहले ही पुलिस की इस फॉरेंसिक टीम ने सैपल व साक्ष्य संग्रहीत कर लिए थे। मामले में पुलिस ने 24 घंटे के भीतर ही आरोपी बड़े भाई और भाभी को गिरतार कर लिया।

केस-दो
सैरुणा थाना इलाके में सावंतसर गांव में एक व्यक्ति ने नींद में सो रहे अपने भाई मोहनलाल और भाभी सुशीला पर जानलेवा हमला किया, जिसमें सुशीला की मौत हो गई। इस घटनाक्रम में भी स्थानीय पुलिस की फॉरेंसिक टीम के जवानों ने सबूत व साक्ष्य सग्रहीत किए। दो दिन बाद ही आरोपी को गिरतार कर लिया गया।

इन जवानों को मिली प्राथमिकता
एएसपी (शहर) दीपक शर्मा बताते हैं कि पुलिस की फॉरेंसिक टीम के लिए मैथ्स व बायोलॉजी में 12वीं में उच्च अंक प्राप्त करने वाले जवानों को प्राथमिकता दी गई। साथ ही देखा गया कि वे जवान इस कार्य में रुचि रखते हैं या नहीं।

ऐसे हुआ चयन और यूं दिया प्रशिक्षण
जिले के प्रत्येक थाने से दो-दो सिपाहियों का चयन हुआ। पहले चरण में आठ जवानों का चयन क र तीन माह तक प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे चरण में सभी थानों से दो-दो जवानों को प्रशिक्षण दिया गया। जिले के महिला और साइबर थाने को छोड़कर 27 थानों के 54 जवानों को प्रशिक्षित किया गया। इन जवानों को बीकानेर एवं जयपुर स्थित फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की ओर से प्रशिक्षण दिया गया।