
फाइल फोटो
-आशीष जोशी
इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में भी कामगारों की जान जोखिम में डाल सीवरेज और सेप्टिक टैंक सफाई के लिए अंदर उतारा जा रहा है। इस मशीनरी युग में भी बगैर सुरक्षा संसाधनों के उन्हें अमानवीय तरीके से भीतर उतारने से सफाईकर्मियों का दम टूट रहा है। प्रदेश में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई में जानलेवा लापरवाही बरतने से पांच साल में 17 कामगारों की दम घुटने से मौत हो गई। देश में वर्ष 2017 से 2021 तक सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान 325 सफाईकर्मियों ने दम तोड़ दिया। इस अवधि में उत्तराखंड, गोवा, पुडुचेरी और त्रिपुरा में ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया। वहीं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और केरल में पांच साल में एक-एक मौत हुई। इधर, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अनुसार साल 2010 से मार्च 2020 तक सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान देश में 631 लोगों की मौत हुई है।
कानून है, पालना में कोताही
हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के रूप में नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास नियमावली 2013 के तहत ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध जुर्माने से लेकर कड़ी कार्रवाई तक का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च 2014 को सीवरेज कार्यों (मेनहोल और सेप्टिक टैंक) में मृत्यु होने पर परिजनों को 10-10 लाख रुपए की क्षतिपूर्ति देनेे के आदेश दिए थे। स्थानीय निकाय जयपुर के कार्यालय उप निदेशक (क्षेत्रीय) ने 6 फरवरी 2015 को राज्य के सभी नगर निकायों को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे।
दो मामलों से समझें दर्द : इसी साल बीकानेर में हुआ था हादसा
केस एक : 27 मार्च 2022 को बीकानेर में एक ऊन फैक्ट्री में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान दम घुटने से चार मजदूरों की मौत हो गई। फैक्ट्री में बने सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए दो कामगार टैंक में उतरे। गैस के कारण वे बेहोश हो गए। काफी देर तक दोनों बाहर नहीं आए और न ही उन्होंने आवाज देने पर जवाब दिया तो दो अन्य मजदूर टैंक के अंदर गए, लेकिन वे भी बाहर नहीं आए। चारों मजदूरों ने दम तोड़ दिया।
केस दो : 2 अप्रेल 2019 को रात 10 बजे उदयपुर की अशोक विहार कॉलोनी के एक मकान में नगर निगम की गाड़ी से सेप्टिक टैंक खाली करवाया, लेकिन पैंदे में करीब एक फीट मलबा मशीन से नहीं निकल पाने पर सफाईकर्मियों को अंदर उतारा गया। हादसे में एक-एक करके चार लोगों की दम घुटने से मौत हो गई।
टैंक बनाने से लेकर खाली करने तक बरती जा रही लापरवाही
प्रदेश के कई शहरों में सेप्टिक टैंक नियम विरुद्ध बने हुए हैं। वर्ष 2016 में हुए एक सर्वे के अनुसार उदयपुर नगर निगम क्षेत्र में 70 हजार घरों में सेप्टिक टैंक हैं। अधिकतर गलत तरीके से बने हैं। बमुश्किल पांच हजार घरों में ही तय नियमों का पालन हुआ। टैंक तीन से पांच वर्षों में खाली होने चाहिए, लेकिन लोग 20 से 30 वर्ष में खाली कराते हैं। जिससे इनमें खतरनाक अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फाइड गैस बन जाती है। इन्हें खाली कराने के लिए लोग मशीन के बजाय मजदूर बुलाते हैं। ऐसी आपदा से निपटने के लिए प्रदेश के शहरी निकायों के पास संसाधन और दक्ष स्टाफ तक नहीं है। निकायों को मानकयुक्त टैंक मैनुअल भी दिया गया था लेकिन इसकी पालना में कोताही बरती जा रही है।
ऑक्सीजन शून्य हो जाते हैं टैंक
टैंक सफाई में भारी मात्रा में एसिड का उपयोग कियाा जाता है। टैंक में बनने वाली हाइड्रोजन सल्फाइड, अमोनिया व अन्य विषैली गैसों का मिश्रण ऑक्सीजन रहित स्थिति बना देता है। इस कारण दम घुटने से कामगारों की मौत हो जाती है।
यह एहतियात जरूरी
- सेप्टिक टैंक निर्धारित मानकों के अनुसार ही बने।
- टॉयलेट्स में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उपयोग नहीं हो।
- टैंक तीन से पांच वर्षों में मशीन से खाली हो।
- खाली कराने से पहले गैस डिटेक्टर से जांच कराएं।
- कामगार ऑक्सीजन मास्क, गम ***** व दस्ताने पहनें।
- दल को दुर्घटना प्रबंधन का प्रारंभिक प्रशिक्षण भी होना चाहिए।
राजधानी से लेकर यूपी तक जानलेवा लापरवाही
राज्य - मौतें
यूपी - 52
तमिलनाडु - 43
दिल्ली - 42
हरियाणा - 33
महाराष्ट्र - 30
गुजरात - 28
कर्नाटक - 26
पंजाब - 16
पं बंगाल - 14
राजस्थान - 13
आंध्रप्रदेश - 13
तेलंगाना - 06
चंडीगढ़ - 03
बिहार - 02
ओडिशा - 02
मध्यप्रदेश - 01
छत्तीसगढ़ - 01
कर्नाटक - 01
(केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2007 से 2021 तक के आंकड़े)
आयोग ने पत्र लिख किया सचेत
सर्वोच्च न्यायालय और सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कई जगह सफाईकर्मियों को सीवरेज और सेप्टिक टैंक में उतारने जैसा अमानवीय और घृणित कार्य करवाया जा रहा है। आयोग ने इस संबंध में सभी निकायों और निजी एजेंसियों को पत्र लिख सचेत किया है। बीकानेर में हुए हादसे के दौरान मैं स्वयं मौके पर गया था। सरकार ने मशीनरी की व्यवस्था कर रखी है। फिर भी कहीं कोई समस्या आ रही है तो वह आयोग को अवगत करवाए। हम समाधान करवाएंगे।
- किशनलाल जेदिया, उपाध्यक्ष, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग।
Published on:
17 Jun 2022 12:57 am
बड़ी खबरें
View Allबीकानेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
