
भुजिया से पहचान, मल्टीग्रेन से मिला नया आसमान
दिनेश कुमार स्वामी
बीकानेर. सात समंदर पार तक अपनी स्वादिष्ट भुजिया के लिए खास पहचान बना चुका बीकानेर का नमकीन उद्योग नई अंगड़ाई ले रहा है। अलग-अलग तरह के मोटे अनाज के आटों के मिश्रण, कई तरह के मसालों को मिलाकर और विभिन्न खाद्य तेलों से उत्पाद तैयार करने के नित नए प्रयोग यहां हो रहे हैं। लोगों के जीभ के बदलते स्वाद के साथ यहां का नमकीन उद्योग भी बदल रहा है। मोठ और बेसन के भुजिया अलग-अलग साइज में तैयार किए जाते रहे हैं। लेकिन अब अलग-अलग आकार-प्रकार और स्वाद के नमकीनों की खपत भुजिया के बराबर ही होने लगी है। यही वजह है कि बड़ी फैक्टि्रयां अब भुजिया के साथ दस से पन्द्रह तरह के अन्य उत्पाद भी तैयार करने लगी है। बीकानेर संभाग में रोजाना 400 से 500 टन नमकीन तैयार होती है। इनमें करीब ढाई सौ टन भुजिया तैयार होती है। यहां तक कि छोटे आकार में कचौरी और समोसा भी पैकिंग उत्पाद के रूप में बाजार में उतारे गए हैं।
अब यह उत्पाद बनने लगे यहांमुख्य रूप से पांच प्रकार की भुजिया बनती है। इसके साथ ही मूंगफली की टेस्टी, सोया स्टिक, पंजाबी तड़का, लाइट चिवड़ा, मसाला चिवड़ा, चना चोकोर, लेमन भेल, कुरकुरे, पफकॉर्न, मूंग दाल, चना दाल, व्रत के लिए फलों से बने नमकीन, आलू व केले से बने नमकीन, ड्राईफ्रुट से बने नमकीन, रोस्टर्ड मूंगफली व साबुत चना, मटर, बाजरा, मक्की से उत्पाद तैयार हो रहे हैं।
मोटे अनाज की बढ़ी मांग
मिलेट्स यानि मोटा अनाज के खाद्य उत्पाद तेजी से पॉपुलर हो रहे हैं। यूएन की ओर से साल 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स घोषित करने के बाद यह सबकी नजर में आए हैं। इनमें बाजरा, ज्वार, रागी, चना, कोदो, मोठ, मक्का, कंगनी, रागी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी भारत को दुनिया में मोटे अनाज का हब बनाने की बात कही है। इसके बाद से मोटे अनाज से नमकीन खाद्य तैयार करने पर यह इंडस्ट्री तेजी से काम कर रही है।
बीकानेर का नमकीन उद्योग
भुजिया-नमकीन की बड़ी इंडस्ट्री - 8 से 10
मध्यम दर्जे के उत्पादक- 100 से 125
छोटे पैमाने पर निर्माण - 1000 से अधिक ईकाइयां
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बाजार में खपत का यह क्रम
सबसे ज्यादा - भुजिया
दूसरे नम्बर पर- मूंग दालतीसरे नम्बर पर- टेस्टी और आलू भुजिया
चौथे नम्बर पर- साबुत अनाज, मटर, चना
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खाना-खिलाना शौक, अब बीकानेर की इकोनॉमी इसी पर
बीकानेर में खाने-खिलाने का शौक रहा है। यही वजह है कि यहां भुजिया अलग-अलग स्वाद, आकार में मेहमान नवाजी के लिए बनने लगे। यह शौक घरों में छोटी-छोटी भट्ठियों से होते हुए बड़े-बड़े कारखानों की वजह बनता गया। अब भुजिया के साथ अलग-अलग तरह के 15 से ज्यादा उत्पाद तैयार हो रहे हैं। जो देशभर के बाजारों में बेचे जाते हैं।
एक्सपर्ट व्यू : सीमित दायरे से बाहर निकला नमकीन उद्योग
नमकीन उद्योग में इनोवेशन अब नॉर्थ, इस्ट, साउथ और सेंट्रल इंडिया के लोगों के स्वाद के अनुरूप किए जा रहे हैं। यहां तक कि जौ, ज्वार के साथ बाजरा और साबुत अनाज के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। पहले भुजिया का सीमित कारोबार और साल के कुछ महीने का सीजन रहता था। नए उत्पाद जुड़ने से अब सालभर इंडस्ट्री मेंं काम चलता रहता है। चना, मोठ, मूंग, उड़द, चावल के आटे के अलग-अलग समूह बनाकर मिश्रण से नमकीन तैयार किए जा रहे हैं। पहले सोया का आटा उस गुणवत्ता का उपलब्ध नहीं होता था, लेकिन इसके बने उत्पादों को लोगों ने पसंद किया तो अब यह उद्योगों को उपलब्ध होने लगा है। हालांकि भुजिया आज भी सदाबहार है, परन्तु इसके बराबर खपत अन्य प्रकार की दालों, मसालों और विभिन्न खाद्य तेलों से बनने वाले नमकीन उत्पादों की हो गई है।
- आशीष अग्रवाल, उद्यमी
Published on:
27 May 2023 12:50 pm
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