26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सोशल मीडिया पर भ्रम का जाल बुन हो रहे मालामाल, ठगा जा रहा किसान

Bikaner News: फेक सूचनाओं से जमाखोरी और मुनाफाखोरी का खेल : भावों व मौसम पूर्वानुमान को लेकर किसानों और छोटे व्यापारियों काे किया जा रहा भ्रमित। जीरा, ईसबगोल के बाद अब ग्वार पर नजर।

2 min read
Google source verification
सोशल मीडिया पर भ्रम का जाल बुन हो रहे मालामाल, ठगा जा रहा किसान

सोशल मीडिया पर भ्रम का जाल बुन हो रहे मालामाल, ठगा जा रहा किसान

दिनेश कुमार स्वामी

बीकानेर. सोशल मीडिया पर सही जानकारी जहां लोगों के लिए वरदान साबित हो सकती है, वहीं फेक सूचना बड़ा नुकसान भी कर सकती है। सामान्य जन-जीवन के साथ अब व्यापार में भी सोशल प्लेटफार्म पर भ्रमजाल फैलाकर मुनाफा कमाने का खेल शुरू हो गया है। खासकर कृषि उत्पाद इसके निशाने पर है। सबसे ज्यादा नुकसान किसानों और छोटे व्यापारी को हो रहा है। इसमें फसलों के उत्पादन को लेकर भविष्यवाणी और कृषि जिंसों के भावों को लेकर भ्रम फैलाया जाता है। मौसम को लेकर गलत अनुमान प्रसारित कर मुनाफाखोरी के प्रयास होने लगे हैं।

पिछले सीजन में जीरा व इसबगोल की फसल को औने-पौने दामों में हथियाने के लिए सोशल मीडिया को हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया। तब अच्छी फसल आ रही होने का भ्रम फैलाया गया। किसान मंडी में फसल लेकर आए तो उन्हें बहुत कम दाम मिले। छोटे व्यापारी ने भी फसल को खरीद के बाद तुरंत बड़े व्यापारी को बेच दिया। बाद में मांग के अनुरूप उत्पादन नहीं रहने से भावों में अप्रत्याशित तेजी आई। जीरा और ईसबगोल के भाव दोगुना हो गए। अब खासकर ग्वार को लेकर भी ऐसे ही भ्रम फैलाने की फिर कोशिश हो रही है।अगस्त के अंतिम सप्ताह के बाद मौसम विभाग ने राजस्थान में बारिश की बहुत कम संभावना व्यक्त कर रखी है। हालात सूखे के बन रहे हैं। ऐसे में फसलों का उत्पादन प्रभावित होना लाजमी है। अब खरीफ की फसलों को किसान बाजार में लाने की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच अच्छी फसल का भ्रमजाल बुनकर भावों को गिराने के प्रयास शुरू हो गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म के ग्रुपों में आगे बारिश होने जैसे अनुमान व्यक्त किए जा रहे हैं। आगे खरीफ और आगामी रबी की बुवाई को लेकर भ्रम की िस्थति पैदा की जा रही है। अभी पिछले साल की रबी की फसल बड़े किसानों और व्यापारियों के पास है। आगामी फसल के अनुमान के अनुसार इसके भाव बढ़ने-घटने हैं। जिसे प्रभावित करने का खेल चल रहा है।

---

टॉपिक एक्सपर्टपुखराज चोपड़ा, कमोडिटी एक्सपर्ट

फेक सूचनाओं से ठगा जा रहा किसान

सोशल मीडिया पर तो स्थानीय और देश-प्रदेश के व्यापारियों के सैकड़ों ग्रुप बने हुए हैं। इनमें से कुछ ग्रुप में फेक और कपोल कल्पित सूचनाओं से किसी टारगेट जिंस को लेकर माइंड सेट तैयार करने की कोशिश हो रही है। पिछली रबी सीजन में आधिक बारिश व तूफ़ान आदि से फ़सल खराब हो रही थी तब देशभर का मीडिया इसे रिपोर्ट कर रहा था। इससे इतर हर हाथ में मोबाइल के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नुकसान बहुत कम और हल्ला ज्यादा होने की सूचनाएं प्रसारित की गई। इसके पीछे मकसद था आने वाली फ़सलों के भावों को नीचे रखकर बड़े पैमाने पर जमाखोरी कर मुनाफा कमाना। इस प्रचार ने किसानों के साथ एक तरह से ठगी का काम किया। जिसका उदाहरण है 27 हजार रुपए प्रति क्विंटल मंडी में बिका किसान का जीरा। 65 हजार और 16 हजार बिकने वाला इसबगोल 28 हजार पर पहुंच गया। जो किसान इस सोशल मीडिया के प्रचार में आकर फ़सल बेच गए, उन्हें बाद में पछताना पड़ा। इस पर सरकार को अंकुश लगाना चाहिए। हालांकि एक्सचेंज के लिए सेबी ने नियम बना रखे हैं। सेबी से रजिस्टर्ड ही कोई टेक्निकल कॉल दे सकते हैं, परन्तु अनरजिस्टर्ड फर्म और लोग सोशल मीडिया ग्रुपों में कॉल देते हैं।