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धूप से बचने वाले बच्चों पर सूखा रोग का खतरा

- शिशु अस्पताल की ओपीडी में कई बच्चे आ रहे, जिनकी मांसपेशियां में दर्द - चिकित्सकों की सलाह, अभिभावक, बच्चों को धूप में खेलने दें

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धूप से बचने वाले बच्चों पर सूखा रोग का खतरा

धूप से बचने वाले बच्चों पर सूखा रोग का खतरा

जयप्रकाश गहलोत
बीकानेर. धूप से बचने की आदत बच्चों पर भारी पड़ रही है। हर दम धूप से बचने एवं कमरों में रहने वाले बच्चों की हड्डियां नर्म और कमजोर हो रही हैं। धूप की कमी से बच्चे रिकेट्स (सूखा रोग) की चपेट में आ रहे हैं। कोरोना के दौरान बाहर निकलना कम हुआ, तो ऐसे बच्चों की संख्या प्री-कोराना काल से तीन गुनी हो गई है। यही नहीं, ऐसे कुछ बच्चों के अभिभावक बिना डॉक्टर की सलाह के उन्हें विटामिन-डी दे रहे हैं, जिससे वे हाइपर विटामिनोसिस डी के शिकार भी बन रहे हैं। ऐसे कई मामले एसपी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध पीबीएम के शिशु अस्पताल एवं अस्थि रोग विभाग में सामने आए हैं, जिनमें सात से 15 साल तक के बच्चों की मांसपेशियां कमजोर होकर दर्द देने लगीं।
यह आ रही समस्या

शिशु रोग विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि यहां ओपीडी में रिकेट्स से ग्रसित कई बच्चे पहुंच रहे हैं। यह वे बच्चे हैं, जो घर में दिनभर मोबाइल चलाते हैं। एसी कमरों में बैठे रहते हैं और धूप में कभी निकलते ही नहीं हैं। ऐसे में इन बच्चों में सूखा रोग घर कर रहा है। चिकित्सकों ने कई बच्चों के अभिभावकों को सलाह दीकि वे बच्चों को हर दिन कुछ समय के लिए धूप में जरूर खेलने दें अथवा जाने दें। ऐसा करने पर बच्चों में सुधार भी हुआ है।


शोध में भी साबित हुआ
पीबीएम अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ की मानें, तो हाल ही में कानपुर के एक मेडिकल कॉलेज ने रिकेट्स को लेकर बच्चों पर स्टडी की, जिसमें बेहद चौकाने वाली जानकारियां सामने आईं। करीब 250 से अधिक बच्चों पर की गई स्टडी में पता चला कि 45 प्रतिशत बच्चों की टांगें इतनी कमजोर और मुलायम हो गईं कि उनका एलाइन्मेंट सीधे की बजाय घूमने लगा और टांगें टेढ़ी हो गईं। 50 प्रतिशत बच्चों में मांसपेशियों में कमजोरी, मेरूदण्ड में असामान्य टेढ़ापन मिला। रिकेट्स के 80 फीसदी बच्चों में कलाई, घुटने, टखने के आसपास हड्डियां जरूरत से ज्यादा मोटी पाई गईं, जिसे रिकेट्स का प्राथमिक लक्षण रिकॉर्ड किया गया।

ये है लक्षण
- बच्चों को भूख कम लगना

- छाती की हड्डी का विकृत होना
- घुटने व हाथों का टेढ़ा होना

- बच्चों में आलस करना, खेलने व खाने का मन नहीं करना
- बच्चों में बार-बार इन्फेक्शन होना

इन पर करें गौर
- रिकेट्स के शिकार अधिकांश बच्चे घनी आबादी व शहरी क्षेत्र से है। इनमें 100 में से 35 बच्चे धूप से बचने की कोशिश करते हैं।

- हड्डियों में ग्रोथ के समय विटामिन डी की कमी से हड्डियों में कैिल्शयम का साइकिल गड़बड़ हो जाता है। इससे बच्चों के घुटने अंदर की तरफ झुकना, मांसपेशियों में दर्द, हाथों व पैरों की पिंडलियों में दर्द रहने लगता है।


इनका कहना है...

बच्चों में रिकेट्स का ग्राफ कोरोना काल के बाद से तेज हो गया है। धूप और गर्मी से बचना, प्रकृति के हिसाब से अपने को समायोजित न करना बच्चों पर भारी पड़ रहा है।

डॉ. जीएस तंवर, प्राेफेसर शिशु रोग विभाग एसपी मेडिकल कॉलेज


इनका कहना है...
बच्चों के विटामिन डी टेस्ट के साथ कैिल्शयम और फास्फोरम जांच कराई गई, जिसमें बहुत कमी पाई गई। इसके चलते बच्चों में जल्दी थकान व मांसपेशियों में दर्द की शिकायतें आ रही हैं। रिकेट्स को लेकर अब सभी को अलर्ट रहना होगा।

डॉ. बीएल खजोटिया, विभागाध्यक्ष, अिस्थ रोग विभाग, एसपी मेडिकल कॉलेज