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यहां बनती है  51  किलो वजन की एक रोटी,लगाते है भगवान को भोग

आटा, बेसन व मैदा से होती है तैयार, काजू, बादाम, पिस्ता से सजावट    

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यहां बनती है 51  किलो वजन की एक रोटी,लगाते है भगवान को भोग

यहां बनती है  51  किलो वजन की एक रोटी,लगाते है भगवान को भोग

विमल छंगाणी

बीकानेर. घर और होटल, रेस्टोरेंट में बनने वाली रोटी महज कुछ ग्राम की ही होती है। अगर यह कहा जाए कि एक रोटी 51 किलोग्राम वजन की भी होती है तो आश्चर्य होगा। बीकानेर में सवामणी प्रसाद के दौरान 51 किलोग्राम वजन की एक रोटी तैयार की जाती है। इसे स्थानीय भाषा में ‘रोटा’ भी कहा जाता है। इसे आटा, बेसन, मैदा, अजयवायन, नमक, पिसी हुई चीनी से बनाया जाता है और काजू, किसमिस, बादाम, पिस्ता आदि से सजाया जाता है। मनोकामना की पूर्ति होने पर श्रद्धालु सवामणी प्रसाद में एकल रोटा का प्रसाद अर्पित करते है। पूनरासर हनुमान मंदिर में सवामणी प्रसाद में इस एकल रोटा का आयोजन अधिक होता है। इसे तैयार करना न केवल श्रमसाध्य कार्य है व अनुभवी व्यक्ति ही इसे तैयार करते है।

इनसे बनता है रोटा
सवामणी रोटा बनाने से पिछले 20 वर्षो से जुड़े आशाराम जोशी बताते है कि सवामणी प्रसाद के लिए तैयार होने वाले रोटे का वजन करीब 5१ किलोग्राम होता है। इसमें 18 किलोग्राम आटा, 3 किलोग्राम बेसन, 2 किलोग्राम मैदा, 12 किलोग्राम देशी घी, पिसी हुई चीनी 10 किलोग्राम, काजू 2 किलोग्राम, किसमिस 2 किलोग्राम, गिरी बुरादा 2 किलोग्राम, एक किलोग्राम नमक, 500 ग्राम पिस्ता, 250 ग्राम अजवायन, 100 ग्राम इलायची, 50 ग्राम जावत्री, 5 ग्राम केसर पड़ता है।

5 घंटे में तैयार
सवामणी का रोटा करीब पांच घंटे में बनकर तैयार होता है। जोशी के अनुसार आटा, बेसन, मैदा, नमक, अजवायन, मीठा सोढ़ा को मिलाकर आटे को गूंथकर तैयार किया जाता है। एक बड़ी परात में इसे गोलाकार आकृति दी जाती है। फिर इसे लोहे की तवी पर रख दिया जाता है। नीचे धीमी आग से यह पकता रहता है। रोटे के ऊपरी हिस्से को सेकने के लिए पहले बालू मिट्टी को गर्म किया जाता है। फिर रोटे के ऊपर बालू मिट्टी डाल दी जाती है। गर्म मिट्टी से रोटे का ऊपरी हिस्सा भी पक कर तैयार हो जाता है। फिर बालू मिट्टी को हटा देते है।

मनोकामना पूर्ति पर सवामणी का प्रसाद
मंदिर श्री पूनरासर हनुमानजी पुजारी ट्रस्ट के मंत्री महावीर बोथरा के अनुसार पूनरासर हनुमान मंदिर में भक्त अपनी मनोकामना की पूर्ति होने पर सवामणी प्रसाद में 51 किलोग्राम रोटे का भोग भी अर्पित करते है। रोटे का चूरमा बनाया जाता है। श्रद्धालु अपने स्तर पर इस एकल रोटे को तैयार कर बाबा के भोग अर्पित करते है। इसे तैयार कर ड्राई फ्रूट से सजाया भी जाता है। रोटे का चूरमा बनता है व श्रद्धालु प्रसाद रुप में ग्रहण करते है।

ड्राई फूड से सजावट
तैयार रोटे को एक बड़ी परात में रख देते है। इसे काजू, किसमिस, पिस्ता, बादाम, गुलाब पुष्प, इलायची से कलात्मक रुप से सजाया जाता है। इसे सजाने में करीब दो घंटे का समय लग जाता है। फिर इस पूरे रोटे को ही पूनरासर हनुमान के भोग अर्पित किया जाता है। रोटे से बने चूरमे के साथ चावल और दाल भी बनाए जाते है।