
अब ड्रोन पहुंचाएगा ब्लड, सैम्पल और दवाइयां, अस्पतालों में बनेंगे ड्रोन स्टेशन
आशीष जोशी
जहां भर ना सकी कल्पना उड़ान, वहां पहुंचा आज का विज्ञान...बचपन में सुनी कविता की यह पंक्तियां अब चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भी साकार हो रही है। अब वह घड़ी आ रही है जब दुर्गम इलाकों में िस्थत चिकित्सा संस्थानों तक रक्त, वैक्सीन, दवाइयां और अन्य जीवनरक्षक सामग्री ड्रोन के जरिए मिनटों में पहुंच जाएंगी। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की आई ड्रोन पहल के प्रारंभिक परिणामों ने यह उम्मीद जगाई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एनएचएसआरसी) के सहयोग से जोधपुर एम्स समेत देश के 13 एम्स और 29 चिकित्सा संस्थानों में ड्रोन के उपयोग के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया था। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अब इस संबंध में एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी करने की तैयारी की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, राजस्थान सहित कई राज्यों में ड्रोन के जरिए दुर्गम स्थानों तक कम समय में टीके, रक्त और सैम्पल पहुंचाने की ट्रायल सफल रही है। कई दौर की ट्रायल के बाद ऋषिकेश एम्स ने तो इसी महीने ड्रोन चिकित्सा सेवा शुरू भी कर दी है।
जानिए, कब कहां सफल रही ट्रायल
16 सितम्बर 2023 जोधपुर एम्स : आबूरोड में संचालित एम्स के केंद्र से सिरोही जिले के रिमोट एरिया वाले वालोरिया तक ड्रोन से दवा पहुंचाई।
14 फरवरी 2024 भोपाल एम्स : करीब 40 किलोमीटर दूर गौरहरगंज पीएचसी तक सिर्फ 20 मिनट में दवाइयों की डिलीवरी। लौटते वक्त ड्रोन अपने साथ मरीज के सैम्पल भी लेकर आया।
20 फरवरी 2024 छत्तीसगढ़ : अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज से उदयपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक ड्रोन दवा लेकर गया। वहां से रक्त सैंपल लेकर कॉलेज पहुंचा।
27 जनवरी 2024 भुवनेश्वर एम्स : ड्रोन उड़ान ने 35 मिनट में 60 किमी की दूरी तय कर एम्स भुवनेश्वर से खोरधा जिले की टांगी सीएचसी तक ब्लड बैग पहुंचाया।
15 अक्टूबर 2023 बिलासपुर एम्स : एम्स से सीएचसी दाड़लाघाट तक ड्रोन से डेढ़ किलो वजनी ब्लड बैग पहुंचाए गए। करीब 17 किमी की हवाई दूरी ड्रोन ने 15 मिनट में तय की। जबकि सड़क मार्ग से 30 किमी की इस दूरी को तय करने में डेढ़ घंटा लगा।
ड्रोन दीदी...स्वास्थ्य मोर्चा भी संभालेगी
ड्रोन (अनमैन्ड एरियल व्हीकल-यूएवी) से चिकित्सकीय सामान पहुंचाने में भी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की भूमिका होगी। नमो ड्रोन दीदी ड्रोन में सामान चढ़ाना, उतारना और उड़ाने का कार्य करेंगी। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से इन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पहले चरण में दवा-ब्लड और सैम्पल, अगले चरण में उड़ान भरेंगे अंग
- जाम लगने, पुल टूटने अथवा अन्य कारणों से मार्ग बाधित होने पर वांछित इलाकों तक जरूरी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। ग्रीन कॉरिडोर बनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।
- अभी दवा और वैक्सीन पहुंचाने से लेकर सैंपल कलेक्शन जैसे कार्य के लिए ड्रोन का उपयोग होगा। अगले चरण में अति आवश्यक अंग प्रत्यारोपण के लिए ऑर्गन भी ड्रोन पहुंचाएगा।
भोपाल एम्स की तर्ज पर बीकानेर में भी बन सकते हैं ड्रोन स्टेशन
एम्स भोपाल के ट्रोमा और इमरजेंसी ब्लॉक की छत पर दो ड्रोन स्टेशन बनाए गए हैं। वहीं बीकानेर में निर्माणाधीन 450 बेड की मेडिसिन विंग की छत पर हेलीपेड बनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। जबकि इस विशाल छत पर ड्रोन स्टेशन बनाया जा सकता है। यह विंग दो लाख 89 स्क्वायर फीट में फैली है।
आंकड़ों में जानिए मेडिकल ड्रोन की ताकत
100 किमी की रेंज तक उड़ान भर सकता है एक बार चार्ज करने पर
5 किलोग्राम तक ले जा सकता है दवाइयां व अन्य चिकित्सकीय सामान
25 मिनट में तय करेगा 32 किमी की हवाई दूरी
120 किमी प्रति घंटा है ड्रोन की टॉप स्पीड
4 डिग्री सेल्सियस का तापमान मेंटेन रख सकते हैं परिवहन के दौरान
Published on:
28 Feb 2024 05:30 pm
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