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नौनिहालों पर भारी सर्दी-जुकाम

बच्चा अस्पताल में बढ़े मौसमी बीमारियों के मरीज, चिकित्सक दे रहे बच्चों को ड्रेसअप की सलाह

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सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही पीबीएम के बच्चा अस्पताल में सर्दी-खांसी, बुखार, अस्थमा, अलर्जी से पीडि़त नौनिहालों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। स्थिति यह है कि रोजाना होने वाले आउटडोर में इस प्रकार के बच्चों की संख्या करीब सत्तर फीसदी के आंकड़ों को पार कर रही है।

यहां प्रतिदिन करीब छह सौ बच्चों को चिकित्सक परामर्श और दवाएं उपलब्ध करवाते हैं। राहत की खबर यह है कि वर्तमान में डेंगू, मलेरिया चिकनगुनिया से जुड़े मरीज यहां नहीं पहुंच रहे हैं।

चिकित्सकों का मानना है कि सर्दी-जुकाम, बुखार, अस्थमा तथा एलर्जी से जुड़े छोटे बच्चों को न केवल खाने-पीने में परहेज करना चाहिए, बल्कि वे गर्म कपड़ों का उपयोग भी करें।एेसा करने से छोटे बच्चे आसानी से सर्दी की चपेट में नहीं आ पाएंगे।

भर्ती मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा

बच्चा अस्पताल में नियमित मरीजों की संख्या बढऩे के साथ ही यहां भर्ती मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। वार्डों की स्थिति यह है कि यहां न केवल सर्दी-जुकाम वाले मरीज पहुंच रहे हैं, बल्कि निमोनिया, अस्थमा तथा एलर्जी से पीडि़त छोटे बच्चे भी भर्ती किए जा रहे हैं।

बचाव करेंगे तो, फायदा

पीबीएम बच्चा अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल लाहोटी ने बताया कि छोटे बच्चों को सर्द हवाओं से बचाया जाए तो उन्हें बीमारी से बचाया जा सकता है। लाहोटी के अनुसार वर्तमान में मौसमी बीमारियों से जुड़े बच्चों की संख्या अचानक बढ़ गई है।

प्रतिदिन होने वाले आउटडोर में मौसमी बीमारियों से पीडि़त नौनिहालों की संख्या करीब सत्तर फीसदी आ रही है। सर्दी-जुकाम, बुखार, अस्थमा व एलर्जी से पीडि़त बच्चों को खान-पान और पहनावे में विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है,

एेसे में जुकाम, एलर्जी, अस्थमा के मरीजों को इस मौसम में विशेष ध्यान रखना चाहिए। अगर किसी बच्चों में एेसे लक्षण देखने को मिले तो उन्हें सामान्य बच्चों से दूर रखें, ताकि वे संक्रमण से दूर रह सकें।

अनदेखी पड़ेगी भारी

सर्दी-जुकाम, खांसी, इन्फ्लएंजा, वायरल, फ्लू, अस्थमा, ब्रोन्काइटिस जैसी बीमारियों की अनदेखी छोटे बच्चों पर भारी पड़ सकती है। बच्चों में सर्दी-जुकाम या बुखार जैसे लक्षण नजर आने के साथ ही उन्हें चिकित्सक को दिखाएं, ताकि बीमारी को बढऩे से रोका जा सके।

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