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शिवबाड़ी आवासीय योजना और जमीन अधिग्रहण का मुद्दा उठाया

bikaner news - Shivbari raised the issue of residential planning and land acquisition

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Shivbari raised the issue of residential planning and land acquisition

शिवबाड़ी आवासीय योजना और जमीन अधिग्रहण का मुद्दा उठाया

राजस्थान विधानसभा: लूणकरनसर विधायक सुमित गोदारा और नोखा के बिहारी लाल बिश्नोई ने उठाई समस्याएं

बीकानेर.

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को जिले के नोखा और लूणकरनसर विधायकों ने आमजन की पीड़ा को उठाते हुए सरकार का ध्यान आकृष्ट किया। लूणकरनसर विधायक सुमित गोदारा ने जहां बीकानेर स्थित शिवबाड़ी आवासीय योजना को जल्द शुरू करने तथा नोखा विधायक बिहारी लाल बिश्नोई ने हाउसिंग बोर्ड की ओर से जमीनों का अधिग्रहण करने के बावजूद किसानों को मुआवजा नहीं देने का मुद्दा राजस्थान आवासन बोर्ड (संशोधन) विधेयक 2020 पर उठाया।


आठ साल पहले भूमि अवाप्त की थी, अभी तक घरोंदों का इंतजार

लूणकरनसर विधायक सुमित गोदारा ने कहा कि शिवबाड़ी आवासीय योजना के लिए आठ साल पहले जमीन अवाप्त की गई थी, लेकिन अभी तक हाउसिंग बोर्ड ने कोई काम शुरू नहीं किया है। इस योजना के तहत करीब 13 हजार मकान बनाने की योजना थी।

गोदारा ने कहा कि इस अनदेखी के पीछे जो भी अधिकारी या कार्मिक हो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। गोदारा ने आवासन मण्डल की जमीनों पर हुए अतिक्रमण पर विधानसभा में अपनी नाराजगी व्यक्त की। कहा कि सरकार की योजना को मूर्त रूप देने के लिए जितना समय लग रहा है, उस दौरान वहां अतिक्रमण हो जाता है।

सकारात्मक सोच रखें

विधायक गोदारा ने कहा कि राजस्थान आवासन मण्डल अपने आप को कमजोर समझने के बजाय सकारात्मक सोच रखते हुए कार्य करें। उन्होंने कहा कि निजी प्रोपर्टी डीलर एक-दो साल में कॉलोनी डवलप कर लेते हैं, लेकिन उसी काम को करने के लिए दस-दस साल का समय लगा देता है। एेसा नहीं है कि आवासन मण्डल ने बीकानेर में काम नहीं करवाया, काफी महत्वपूर्ण योजनाएं लाईं गई थी, लेकिन अब कोई काम नहीं करवाया जा रहा है।

मुआवजे के लिए किसान दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को नोखा विधायक बिहारीलाल विश्नोई ने किसानों को समय पर मुआवजा नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बीकानेर में हाउसिंग बोर्ड ने किसानों की बेशकीमती जमीनों का अधिग्रहण किया, लेकिन आज भी वे मुआवजे के लिए दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर है। इतना ही नहीं जिन लोगों को आवासन मण्डल की ओर से भूखंड आवंटित हुए हैं, उन्हें बताई गई सुविधा तक नहीं मिल रही।

जबकि वे नियमित रूप से किश्तें जमा कर रहे हैं। बिश्नोई ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों में अनेक कॉर्नर, दो प्लॉटों के बीच का प्लॉट, दो गलियों के बीच की स्थिति जैसे बहुत प्लॉट खाली पड़े हैं। एेसे प्लॉट को बेचकर सरकार राजस्व अर्जित कर अपने घाटे की पूर्ति कर सकती है।