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भक्त और भगवान के अटूट प्रेम की कथा ने किया भाव विभोर

जीवन की अंतिम बेला में भीष्म पितामह का श्रीकृष्ण के दर्शन करते हुए सजीव झांकी के माध्यम से देह त्याग का वर्णन

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भक्त और भगवान के अटूट प्रेम की कथा ने किया भाव विभोर

भक्त और भगवान के अटूट प्रेम की कथा ने किया भाव विभोर

श्रीडूंगरगढ़. कस्बे के शहीद हेमू कॉलोनी पार्क में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। कथा वाचक सन्त प्रहलाद महाराज ने सृष्टि का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म सदाचार का पालन करना है। उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान है। भगवान की मर्जी के बिना इस संसार में कुछ नहीं हो सकता। इसलिए भगवान की भक्ति जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान एक है, उनके रूप अनेक है। भगवान को पाने का एकमात्र साधन सेवा व प्रेम है। प्रेम को प्रकट करने के लिए परमात्मा की कथा सुनना जरूरी है।

ध्रुव चरित्र की कथा सुनाते हुए उन्होंने भक्ति और दृढ़ संकल्प को विस्तार से समझाया। भक्त और भगवान के इस अटूट प्रेम की कहानी सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए और संकल्प और विश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने की सीख ली। कथा के दौरान संत प्रह्लाद ने पुत्र-पुत्री में भेदभाव नहीं करने और बालकों में संस्कार देने की बात कही।आयोजक बिग्गा बास निवासी महावीर प्रसाद व चंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि कथा में मंगलवार को सुबह 11.15 से शाम 4.15 बजे तक भरत चरित्र, नृसिंह अवतार, प्रह्लाद चरित्र का वर्णन किया जाएगा।

झांकियों ने मोहा मन

इस दौरान बालक ध्रुव से नारदजी का मिलन और ध्रुव को भगवान के दर्शन का सजीव चित्रण किया गया। इसी तरह जीवन की अंतिम बेला में भीष्म पितामह का श्रीकृष्ण के दर्शन करते हुए देह त्याग का वर्णन सजीव झांकी के माध्यम से किया गया। कथा के दौरान दर्शन दो भगवान, मोरी अंखियां प्यासी, मेरे मन बार बार श्री राधे गोविंद बोल जैसे भजनों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया।