
सौर ऊर्जा से बनेगी ज्यादा बिजली, व्यर्थ जा रही ऊष्मा को भी बनाया उपयोगी
अतुल आचार्य
बीकानेर. इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर के मैकेनिकल विभाग की छत पर करीब एक साल से चल रहे शोध के परिणामों ने ऊर्जा क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है। कॉलेज के विशेषज्ञों ने ऐसी तकनीक इजाद की है जिससे न केवल सोलर प्लेटों से बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी हुई, बल्कि व्यर्थ जा रही ऊष्मा के घरेलू और व्यावसायिक उपयोग की भी संभावनाएं दिखाई है।ईसीबी के प्रोफेसर डॉ. चंद्रशेखर राजोरिया और डॉ. धर्मेन्द्र सिंह ने खास तकनीक के फोटो वोल्टेइक थर्मल सिस्टम का निर्माण किया है। जिससे सोलर प्लेटों के नीचे बनने वाली हीट का उपयोग भी हो सकेगा। इस हीट के व्यावसायिक उपयोग के लिए आसपास के उद्योगपतियों से भी बातचीत की जा रही है। डॉ. राजोरिया ने बताया कि ईसीबी के मैकेनिकल विभाग ने टेक्वीप -3 के तहत एनपीआईयू की ओर से प्रायोजित फोटो वोल्टेइक थर्मल सिस्टम तैयार किया गया है। इसमें सोलर पीवीटी एरे के नीचे डक्ट स्थापित किया गया। जो हवा से एरे का तापमान कम कर उसकी दक्षता बढ़ाता है। इससे 7.5 किलोवाट के प्लांट से सामान्य की तुलना में लगभग 12 प्रतिशत ज्यादा बिजली पैदा होती है।
सोलर प्लेटों के नीचे बनने वाली गर्म हवा का भी उपयोगशोध के परिणाम बताते हैं कि सोलर प्लेटों के नीचे उत्पन्न ऊष्मा का उपयोग मकान को गर्म रखने और व्यावसायिक कायोZं में भी हो सकेगा। यह प्रोजेक्ट न केवल घरों और उद्योगों के बिजली बिल और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करेगा, बल्कि यह वायु प्रदूषण को भी कम करता है। इस प्रोजेक्ट में मिलने वाली गर्म हवा का उपयोग किया जा सकेगा। जिसमें सर्दी से बचने के लिए घर को गर्म रखने और खजूर, अंगूर, हल्दी सहित अन्य उत्पादों को सुखाने में भी इसको काम में लिया जा सकेगा।
अनुकूल प्रभावों का किया जा रहा अध्ययन
वर्तमान में ब्लोअर के माध्यम से हवा के प्रवाह को बदलते हुए पूरे सिस्टम पर होने वाले अनुकूल प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। सॉफ्टवेर की मदद से सिमुलेशन भी किया जा रहा है। दक्षता को प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन कर सिस्टम की दक्षता बढाने की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. विनीत कुमार ने बताया की इस तरह के शोध समाज के लिए उपयोगी हैं व विभाग में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं।
इनोवेटिव रिसर्च
कॉलेज के दो प्रोफेसरों की ओर से इस पर शोध कार्य किया गया है। वेदर मॉनिटरिंग स्टेशन की मदद से सोलर इंटेंसिटी, हवा का वेग, तापमान और नमी का डाटा संधारित किया जा रहा है। शोध में कई नवाचार किए गए हैं।
डॉ. मनोज कुड़ी, प्राचार्य, इंजीनियरिंग कॉलेज बीकानेर
Published on:
18 Feb 2023 06:20 pm
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