
Steppe Eagle in Bikaner
बीकानेर. बीकानेर के जोड़बीड़ में इन दिनों पालतू स्टेपी ईगल देखने को मिल रही है। हजारों किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जोड़बीड़ में कुछ पालतू स्टेपी ईगल आई हैं। बीकानेर में इनकी संख्या १२०० से लेकर १३०० के बीच पहुंच गई हैं। कजाकिस्तान, मंगोलिया, रूस आदि देशों से कई स्टेपी ईगल प्रवास के दौरान बीकानेर पहुंचीं। विदेशों में कई स्टेपी ईगल पालतू होने के कारण खाने की तलाश में बीकानेर आई हैं।
पक्षी विशेषज्ञों ने इसकी पुख्ता जानकारी कर बताया कि स्टेपी ईगल के पैर में रस्सी बंधी हुई है। विदेशों में इन स्टेपी ईगल को लोग पालते हैं और इनके पैर में रस्सी बांधते हैं। स्टेपी ईगल के पंजे तीखे होने से वे अपने हाथ में दस्ताने पहनते हैं। यह स्टेपी ईगल शिकार में सबसे तेज होती है और आकार में दूसरी ईगल से सबसे बड़ी होती है। जोड़बीड़ में स्टेपी ईगल के पैर में रस्सी बंधी पहली बार मिला है। इसके साथ ही हर वर्ष पक्षियों में टैगिंग की संभावना बढ़ती जा रही है।
स्टेपी ईगल की यह है विशेषता
लम्बाई ६२ से ८१ सेमी., पंख फैलाव १.६५ से २.१५ मीटर, वजन २ से ५ किलो होता है। इसके पंजे व चोंच गहरे पीले रंग की, चोंच के आगे का हिस्सा हल्के रंग का। इसकी आंखें बड़ी और भूरी होती है। पंजे बड़े आकार के होते हैं और पैर पर से ढके होते हैं। अद्र्धवयस्क चील के पंखों पर सफेद रंग की धारी होती है और रंग भूरा होता है। जबकि वयस्क चील का रंग भूरा-काला होता है।
स्टेपी ईगल से शिकार की शुरुआत
१५वीं शताब्दी के आरंभ में पुरुषों ने पक्षियों के साथ शिकार करना शुरू कर दिया था और यह संस्कृति भी बन गई। शिकार सर्दियों के दौरान होते हैं। शिकारियों की टीम घोड़ों पर शिकार का पीछा करती है और ईगल द्वारा उन्हें शिकार के स्थान का पता लगता है।
इनका कहना है
मध्य-पूर्वी, साउदी अरेबिया, अल्ताई पर्वत आदि देशों में इन पक्षियों को शिकार ढूंढऩे के लिए किया जाता है। बीकानेर में मंगोलिया व अल्ताई से बहुतायात मात्रा में पक्षी आ रहे हैं। पक्षी प्रवास के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है।
डॉ. दाउलाल बोहरा, पक्षी विशेषज्ञ
Published on:
10 Dec 2018 10:04 am
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