
Speed of travel
रेतीले धोरे, बीकानेर की हवेलियां, ऊंट की सवारी, रिसायत कालीन स्थापत्य के नमूने, महल, छतरियां, भाण्डेसर एवं लक्ष्मीनाथ मंदिर, देशनोक में विश्व प्रसिद्ध देवी करणी मंदिर, श्रीकोलायत स्थित कपिल मुनि का विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल देखने आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या में इस वर्ष गिरावट आई है। पिछले वर्षों की तुलना में 30 से 40 फीसदी पर्यटक कम आए हैं।
इससे नवम्बर से फरवरी तक बीकानेर में पर्यटकों के कारण रहने वाली रौनक दिखाई नहीं दे रही है। वहीं पर्यटन से जुड़े व्यवसाय में भी मंदी छाई हुई है। सर्जिकल स्ट्राइक के कारण पहले ही विदेशी पर्यटकों की इस सर्दी में बुकिंग कम हुई। तिस पर नोटबंदी के चलते अब विदेशी पर्यटकों की तादादी लगातार घटती जा रही है।
नए प्रस्तावों की अनदेखी
बीकानेर में पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी मेगा डेजर्ट सर्किट योजना ठंडे बस्ते में है। जैसलमेर जैसा बीकानेर जिले के रायसर या हिमतासर गांव के टिब्बों में सम बनाने का प्रस्ताव भी है। श्रीकोलायत में कपिल सरोवर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने, शिवबाड़ी. मंदिर, भांडेश्वर जैन मंदिर समेत अन्य स्थलों को सुविधाजनक बनाने, कैमल सफारी मार्ग विकसित करने, धार्मिक सर्किट, ग्रामीण पर्यटन, वन्य जीव सर्किट बनाने जैसे प्रस्तावों पर काम नहीं हो रहा है।
संसाधन
50-60 पर्यटन व्यवसायी
शहर में।
124 पंजीकृत गाइड बनाए
गए हैं।
10 ट्रेवलिंग एजेंट।
85 होटलें।
22 पैइंग गेस्ट हाउस।
ये हैं आकर्षण
बीकानेर में पर्यटकों के लिए आकर्षण के स्थल जूनागढ़, लालगढ़ पैलेस, म्यूजियम दर्शनीय स्थल हैं। भाडेश्वर मंदिर, रतन बिहारी-रसिक बिहारी मंदिर , लक्ष्मी नाथ मंदिर, बीकानेर की हवेलिया, शिवबाड़ी मंदिर, उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, देशनोक में करणी मंदिर, गजनेर पैलेस पर्यटन अवश्य रूप से देखते है। पर्यटन विकास के नाम पर ऊंट उत्सव , लोक संगीत और अग्नि नृत्य, उस्ता कला, ऊंट की खाल पर स्वर्ण चित्रकारी जैसी आकर्षक कलाओं को देशी-विदेशी पर्यटकों को भाते हैं।
नकदी की किल्लत
पिछले तीन चार साल से देशी एवं विदेशी पर्यटकों की संख्या कमोबेश चार लाख के आस-पास से घटकर इस वर्ष अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक सवा दो लाख के आस-पास सिमट गई है। इसका सीधा असर बीकानेर की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। पर्यटन व्यवसायी ठाले बैठे हैं। पर्यटन से जुड़े कामकाज ठप हैं। जो पर्यटक बड़े ग्रुप में आए हैं
उनको तो मुद्रा की कोई दिक्कत नहीं है, परन्तु अन्य विदेशी एवं देशी पर्यटकों को नगदी की किल्लत आ रही है। उनके चैक और डालर कैश में नहीं बदल रहे हैं। एटीएम में जाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। वीसा मास्टर कार्ड इनके लिए कारगर नहीं है।
विनोद भोजक, पर्यटन व्यवसायी
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