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पसीना, खुजली, साथ में लाल रैशेज़, मानसून के दिनों में हो सकता है यह रोग

इसकी चपेट में आने से चर्म काली हो जाती है और जलने जैसा अहसास होता है। चिकित्सक इसका एक ही उपाय बताते हैं कि शरीर को ठंडा रखने के काम आने वाले ठंडी तासीर वाले पेय पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन किया जाए।

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पसीना, खुजली, साथ में लाल रैशेज़, मानसून के दिनों में हो सकता है यह रोग

पसीना, खुजली, साथ में लाल रैशेज़, मानसून के दिनों में हो सकता है यह रोग

बीकानेर. इस समय बरसात के कारण बढ़ी उमस की वजह से अन्य बीमारियों के साथ-साथ लोग स्वेट डर्मेटाइटिस बीमारी से भी परेशान होने लगे हैं। यह एक प्रकार का वायरसजनित रोग है, जो ज्यादा उमस तथा पसीने की वजह से होता है। इस समय बीकानेर संभाग में इससे परेशान लोगों का पीबीएम अस्पताल के चर्म एवं रति रोग विभाग में आना शुरू हो गया है। इसकी चपेट में आने से चर्म काली हो जाती है और जलने जैसा अहसास होता है। चिकित्सक इसका एक ही उपाय बताते हैं कि शरीर को ठंडा रखने के काम आने वाले ठंडी तासीर वाले पेय पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन किया जाए। स्वेट डर्मेटाइटिस की वजह से विभाग के आउटडोर में मरीजों की संख्या भी सामान्य दिनों की अपेक्षा बढ़ी है। आउटडोर में आना वाला हर चौथा मरीज स्वेट डर्मेटाइटिस से परेशान है।

बीकानेर संभाग में उमस का ज्यादा असर

विभाग के चिकित्सकों का मानना है कि बरसात के बाद उमस तथा पसीने का असर बीकानेर संभाग में ज्यादा देखने को मिल रहा है। चर्म एवं रति रोग विभाग में बीकानेर के अलावा श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ तथा चूरू जिले के मरीज आ रहे हैं। यह बीमारी श्रमिकों, बसों में सफर करने वाले, रसोई में काम करने वाली महिलाओं तथा फील्ड में काम करने वालों को ज्यादा होती है।

यह हैं लक्षण

स्वेट डर्मेटाइटिस का असर पीठ तथा पेट के ऊपर ज्यादा होता है। इससे त्वचा पहले लाल हो जाती है। इसके बाद जलने से काली और भूरी होने लगती है। जलने जैसा अहसास होने लगता है। इसे स्किन बर्न भी कहा जाता है। तंग कपड़े तथा सिथेंटिक कपड़ों के पहनने से त्वचा को पूरी तरह से हवा नहीं मिलती है और पसीना ज्यादा आने लगता है।

40 प्रतिशत मरीज परेशान

आउटडोर में इस समय पंजीकृत मरीजों में से 40 प्रतिशत मरीज उमस एवं पसीने से त्वचा को हो रहे नुकसान की शिकायत लेकर आ रहे हैं। उनकी त्वचा लाल हो चुकी है। इस प्रकार के मरीजों के आने पर चिकित्सक उन्हें ढीले कपड़े पहनने और ठंडी तासीर वाले पदार्थों का सेवन अधिक करने की सलाह दे रहे हैं।

पहली बार आए इतने मरीज

यह पहला मौका है, जब आउटडोर में स्वेट डर्मेटाइटिस से पीडि़तों की संख्या बढ़ी है। मरीजों को दही, छाछ, शिकंजी, राबड़ी का सेवन अधिक करना चाहिए। - डॉ. राजेशदत्त मेहता, अध्यक्ष चर्म एवं रति रोग विभाग पीबीएम अस्पताल