
Teacher training camp
बीकानेर . प्रशिक्षण सूचियों में ऐसे कई वरिष्ठ शिक्षकों के नाम भी हैं जिन्होंने पूर्व में प्रशिक्षण ले लिया है। जिन वरिष्ठ अध्यापकों ने 2015 के बाद प्रशिक्षण ले लिया है उनको इस बार प्रशिक्षण में नहीं जाने का प्रावधान है। प्रधानाध्यापक कमल कांत स्वामी ने बताया कि शाला दर्पण पोर्टल पर भी ऐसे शिक्षकों के नाम फीड नहीं किए गए थे जिन्होंने 2015 के बाद प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया था।
वरिष्ठ अध्यापकों में इस बात को लेकर रोष है कि जब शाला दर्पण पर ऐसे शिक्षकों के नाम फीड ही नहीं किए तो ये नाम शामिल कैसे हुए। एक तरफ तो विभाग के उच्चाधिकारी कहते हैं कि कार्मिकों की सारी जानकारी शाला दर्पण से ली जाएगी और दूसरी तरफ शाला दर्पण पोर्टल के प्रशिक्षण मॉड्यूल में केवल उन्हीं शिक्षकों के नाम फीड किए गए थे जिन्होंने 2015 के बाद प्रशिक्षण नहीं लिया था, तो फिर प्रशिक्षण ले चुके वरिष्ठ अध्यापकों के नाम प्रशिक्षण सूची में कैसे आए। इससे जाहिर होता है कि शाला दर्पण का प्रशिक्षण मॉड्यूल फेल हो गया है।
प्रशिक्षण प्राप्त वरिष्ठ अध्यापकों का कहना हैं कि आदेशों के बाद भी ऐसा करना उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना है। जिन शिक्षकों ने पूर्व प्रशिक्षण प्राप्त कर लिया था उन्होंने निश्चित होकर ग्रीष्मावकाश में अपने कार्यक्रम निर्धारित कर लिए, लेकिन अब प्रशिक्षण के आदेशों ने ऐसे शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी है।
अतिरिक्त जिला परियोजना समन्वयक रमसा हेतराम सारण का कहना है कि सूची जयपुर से जारी की गई है, इसलिए वह संशोधन नहीं कर सकते। उनका कहना है कि शाला दर्पण पर जिन शिक्षकों के नाम प्रशिक्षण के लिए आए हैं उनको प्रशिक्षण लेना होगा। इस बार बीकानेर जिले के वरिष्ठ शिक्षकों को झुंझनूं जिले में प्रशिक्षण लेना है।
उधर, प्रशिक्षण ले चुके वरिष्ठ अध्यापकों का कहना है कि जारी सूची में करीब 40 प्रतिशत नाम ऐसे शिक्षकों के हैं जिन्होंने 2015 के बाद प्रशिक्षण ले लिया है। उनकी मांग है कि सूची से ऐसे शिक्षकों के नाम हटाकर उन शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाए जिन्होंने अभी तक प्रशिक्षण नहीं लिया है।
Published on:
11 May 2018 09:20 am
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