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दुष्कर्म के आरोपित को दस साल का कारावास

आरोपित को दस साल के कठोर करावास व दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

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बीकानेर . छतरगढ़ थाना क्षेत्र के साढ़े पांच साल पुराने दुष्कर्म के एक मामले में अपर सेशन न्यायाधीश (महिला उत्पीडऩ) मनीषा सिंह ने शनिवार को आरोपित को दस साल के कठोर करावास व दस हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

अपर लोक अभियोजक योगेन्द्र कुमार पुरोहित के अनुसार छतरगढ़ थाने में 17 जून, 2012 को पीडि़ता के पिता ने मामला दर्ज कराया था। इसमें एक डीकेडी छतरगढ़ निवासी पालाराम पर नाबालिग से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया था। मामले में न्यायालय में अभियोजन की पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों की साक्ष्य कराई गई व कुल 38 दस्तावेज प्रदर्शित कराए गए थे।

बचाव पक्ष की ओर से कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की बहस सुनने तथा प्रस्तुत न्यायिक दृष्टांतों के प्रकाश में पालाराम को दुष्कर्म का दोषी मानते हुए धारा 376 के तहत दस वर्ष के कठोर कारावास तथा दस हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदायगी नहीं कराने पर आरोपित को छह माह का अतिरिक्त कारवास भुगतने की सजा सुनाई।

यह है मामला
छतरगढ़ निवासी एक व्यक्ति ने 17 जून 2012 को थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसकी नाबालिग लड़की इस आशय की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, कि उसकी नाबालिग लड़क घर से बाहर शौच करने के लिए गई थी, तब पालाराम टे्रक्टर लेकर आया और उसकी लड़की को पकड़कर दुष्कर्म किया। बालिका ने जब शोर मचाया तो रेवंतराम व दानाराम मौके पर पहुंच गए।

इस दौरान पालाराम भाग गया। परिजन उसके पीछे भी भागे, लेकिन वह हाथ नहीं लगा। परिजन जब वापिस लौटे तो दुष्कर्म पीडि़ता ने कीटनाशक पी लिया। पीडि़ता का उपचार भी करवाया, लेकिन उसने उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

ब्याज सहित लौटानी होगी फीस
बीकानेर. उपभोक्ता न्यायालय मंच ने एक प्रकरण में निर्णय देते हुए पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय को छात्र से ली गई फीस ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए हैं। प्रकरण के अनुसार परिवादी अभिषेक ने वर्ष २०१३ में प्री वेटरनरी टेस्ट पास करने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से मांग की गई फीस करीब दो लाख पांच हजार रुपए जमा करवा दी।

इस बीच छात्र को एमबीबीएस उदयपुर में प्रवेश मिल गया। इसके बाद परिवादी ने अपनी फीस वापस लौटाने की मांग की, लेकिन महाविद्यालय ने फीस लौटाने से इनकार कर दिया। काउंसलिंग में रिक्त सीट का पुनर्भरण भी कर दिया गया था।

मंच ने महाविद्यालय के व्यवहार को अनुचित मानते हुए छात्र द्वारा जमा करवाई गई फीस को नौ फीसदी ब्याज सहित लौटाने के निर्देश दिए। फैसला अध्यक्ष अमर चंद सिंघल, सदस्य पुखराज जोशी तथा इन्दू सोलंकी ने सुनाया।