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‘लाभूजी कटला बावड़ी की गजब कहानी’

पारा पचास पर फिर भी फ्रिज सा ठण्डा पानी, लगती है पानी के लिए कतारें, रोजाना 10 हजार लीटर की खपत, सर्दी में गर्म तो गर्मी में ठंडा रहता है बावड़ का पानी|

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Nikhil Swami

May 22, 2016

Bawdi

Bawdi

पारा पचास डिग्री। घर की छत पर बनी टंकियों का पानी उबाल खाने लगता है। एेसे में किसी बावड़ी में फ्रिज जैसा ठण्डा पानी। वह भी एक दो लीटर नहीं हजारों लीटर।

यह रहस्यमय पानी का भंडार है बीकानेर शहर में कोटगेट के पास स्थित लाभूजी कटला के प्रवेशद्वार के बगल में बनी बावड़ी में। इस बावड़ी के ठण्डे पानी के लिए दिनभर लोगों की कतार लगी रहती है।

बावड़ी जहां गर्मी में सार्वजनिक फ्रिज की जगह काम आती है वहीं सर्दी में गीजर का काम करती है। खास बात यह है कि मौसम के विपरीत इसके पानी का तापमान रहता है।

मसलन जैसे-जैसे दिन चढ़ता है और पारा चढऩे लगता है बावड़ी का पानी और ज्यादा ठण्डा होता जाता है। बावड़ी की इस खासियत का कारण इसे बनाते समय उपयोग की गई सामग्री बताई जा रही है।

करीब तीस साल पहले इसे सफाई के लिए खाली किया गया तब इसकी खासियत की वजह जानने का प्रयास किया गया लेकिन, ज्यादा सफलता नहीं मिली। आज भी इसके मौसम के विपरीत पानी के तापमान की खासियत रहस्य बनी हुई है।

भीषण गर्मी के चलते इन दिनों लाभूजी की बावड़ी की प्याऊ पर दिनभर लोगों की भीड़ लगी रहती है। राहगीर जहां इसके ठण्डे पानी से गला तर करते हैं वहीं आस-पास के दुकानदार अपने कैम्पर इस बावड़ी के पानी से भरते हैं।

बावड़ी के नल पर दिनभर कैम्पर भरकर ले जाने वालों की कतार लगी रहती है। रोजाना करीब 10 हजार लीटर पानी की खपत होती है।

102 साल पहले हुआ निर्माण

लाभूजी कटला में स्थित इस बावड़ी का निर्माण 1912 में सेठ लाभचंद श्रीमाल ने करवाया था। बावड़ी की लंबाई 60 फीट, चौड़ाई 30 फीट और गहराई 35 फीट हैं।

गर्मी की सीजन में इसमें 28 फीट पानी भरा रहता है। बावड़ी को पूरी तरह छत बनाकर कवर किया हुआ है। ऊपर बने हॉल की छत से बारिश का पानी एकत्र होकर बावड़ी में जाता है।

साथ ही कटले में सैकड़ों दुकानों की छत गोलतारा सर्किल में बनाई हुई है। ताकि बरसात में इनकी छत का पानी भी बावड़ी में आ जाए।

चूने और ताम्बा का कमाल

बुजुर्ग बताते हैं कि बावड़ी का फर्श चूना का बनाया हुआ है। इसी की वजह से पानी गर्मी में शीतल और सर्दी में गर्म रहता है। जबकि कुछ लोग कहते हैं फर्श में तांबा, जस्ता सहित अन्य धातुओं का उपयोग किया गया था।

इसी का नतीजा है कि यह प्राकृतिक फ्रीज और गीजर का काम करती है। हालांकि इसके फर्श को आज तक किसी ने नहीं देखा। ना ही इसके अंदर जाने की किसी को अनुमति है। इसकी देखरेख लाभूजी के प्रपौत्र अशोक श्रीमाल कर रहे हैं।

कम पड़ा तो कनेक्शन कराया

पहले बावड़ी में सिर्फ बरसात का पानी संग्रहण कर सालभर पीने के उपयोग में लिया जाता था। कुछ साल पहले पानी कम पडऩे लगा तो जलदाय विभाग के दो कनेक्शन बावड़ी में करवा दिए गए। अब इसमें करीब करीब 20 फीट पानी भरा हुआ है।

बावड़ी के पानी को शुद्ध रखने के लिए समय-समय पर इसमें फिटकरी व पाउडर भी डाला जाता है। बावड़ी का ठंडा पानी भरने के लिए सुबह से लेकर शाम तक लोगों की लाइन लगी रहती है।

32 साल से देखरेख कर रहा हूं

बावड़ी की 32 साल से देखरेख कर रहा हूं। रोजाना 15-20 हजार लोग यहां पर पानी भरने के लिए आते है। कई बार तो गांवों से लोग आते हैं। बीमार व्यक्ति को पिलाने के लिए पानी लेकर जाते हैं।

पानी को शुद्ध रखने के लिए बावड़ी में फिटकरी व पाउडर डाला जाता है। बावड़ी की सफाई करीब तीस साल पहले कराई गई, तब 9 इंच दलदल साफ की गई थी।

इकरामुदीन, बावड़ी केयरटेकर।

किराए से ज्यादा का पानी पी जाते हैं

लाभूजी कटला में हमारी दुकान है। जिसका किराया प्रतिमाह 294 रुपए चुकाते हैं। यदि महीनेभर तक दुकान पर पानी का कैंपर रखवाए तो उसका किराया भी 600 रुपए से ज्यादा होता है।

दुकान किराए से ज्यादा पैसों का तो बावड़ी का पानी पी जाते हैं। कटला की 250 दुकानें बावड़ी की रौनक के कारण ही चलती है।

महेंद्र मनोत, दुकानदार।

हजारों लोग पानी भरने आते हैं

गर्मी के दिनों में बावड़ी का ठंडा पानी भरने के लिए व्यास कॉलोनी, केईएम रोड, खजांची मार्केट, जैन मार्केट, फड़ बाजार, स्टेशन रोड, सट्टा बाजार, रामदेव कटला, सब्जी मंडी आदि क्षेत्रों से लोग यहां पर आते हैं।

गौरीशंकर जोशी, स्थानीय निवासी