
- 16 अगस्त को नहर में मिला था लावारिस शव, 20 अगस्त को कराया अंतिम संस्कार
बीकानेर. जिले के लूणकरनसर अस्पताल में संवेदनहीनता का मामला सामने आया है। यहां मोर्चरी में रखे अज्ञात युवक के शव को कीड़े खा रहे थे। मंगलवार को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी का दरवाजा खोलते ही अंदर का दृश्य देख कर कर्मचारियों के रोंगटे खड़े हो गए। शव पर हजारों कीड़े चिपटे थे। पुलिस ने आनन-फानन में पोस्टमार्टम की औपचारिकता कराकर शाम को शव का अंतिम संस्कार कराया। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनके जवाब किसी के पास नहीं है।
जानकारी के मुताबिक, 16 अगस्त को मलकीसर नहर की पुलिया के पास अज्ञात व्यक्ति का शव मिला। पुलिस ने शव को निकलवा कर शाम चार बजे लूणकरनसर सीएचसी के मुर्दाघर में रखवा दिया। चार दिन बाद पुलिस शव का अंतिम संस्कार कराने के लिए अस्पताल पहुंची, तब शव के हालात देख कर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने का सिलसिला शुरू हुआ।
सीएचसी लूणकरनसर के मुर्दाघर का डीप-फ्रीजर काफी समय से खराब पड़ा है। दावा है कि लावारिस शवों को बर्फ की सिल्लियों में रखवाया गया। फिर भी शव को कीड़े कैसे खा गए, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। टाइगर फोर्स के अध्यक्ष महिपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि मुर्दाघर का डीप-फ्रीजर लंबे समय से खराब पड़ा है। दुरुस्त कराने की कई बार गुहार कर चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। शव खुले में ही रखा पड़ा था। बर्फ भी नहीं लगाई गई, जिस कारण शव को कीड़े खा गए।
पुलिस 3 से 4 दिन तक लावारिस शव की शिनाख्त के प्रयास के चलते सुरक्षित रखवा सकती है। शिनाख्त नहीं होने पर पुलिस ही लावारिस लाश का अंतिम संस्कार करा सकती है। मृतक के कपड़े मालखाने में जमा कराती है। सालों तक पड़े रहने के बाद वे खुद ही नष्ट हो जाते हैं और जांच भी बंद हो जाती है। विशेष परिस्थितियों में शव को पांच-सात दिन तक भी सुरक्षित रखवाया जा सकता है।
शव पुराना होने और पानी में रहने से सड़-गल गया था। कीड़े पहले से लगे हुए थे। 72 घंटे तक शव को शिनाख्त करने के लिए रखने का नियम है। शव को मोर्चरी में रखे 19 अगस्त को 72 घंटे हो गए थे, लेकिन एसएचओ ने एक दिन और सभी थानों में मैसेज कर शिनाख्तगी के प्रयास किए, लेकिन पहचान नहीं हुई। मंगलवार शाम को अंतिम संस्कार करवा दिया।
नरेन्द्र पूनिया, सीओ लूणकरनसर
शव पहले से सड़ा-गला था। नाखून व बाल उखाड़ कर देखे, तो पता चला कि शव पुराना है। लावारिस शव को 72 घंटे रखने का प्रावधान है। डीप-फ्रीज कूलिंग कम करता है, इसलिए बर्फ की सिल्लियों में शव रखा गया था। अस्पताल कार्मिकों की तरफ से कोई लापरवाही नहीं बरती गई।
विजेन्द्र मांझू, प्रभारी सीएचसी लूणकरनसर
Published on:
22 Aug 2024 08:58 am
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