
sonography machine
पीबीएम अस्पताल में सोनोग्राफी करवाने वाले मरीज बेहाल हैं। गर्मी व उमस के बीच मरीजों को सोनोग्राफी करवाने के लिए तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। हालात यह है कि घंटों इंतजार करने के बावजूद सभी मरीजों की सोनोग्राफी नहीं हो पाती है।
मजबूरन मरीजों को निजी लैबों पर मोटी रकम देकर सोनोग्राफी करवानी पड़ रही है। इसकी वजह है सोनोग्राफी मशीनें खराब होना। पीबीएम में पांच में से दो मशीनें पिछले दो महीनों से बंद पड़ी है।
हर दिन 300 सोनोग्राफी
पीबीएम में जनाना, कैंसर व मुख्य भवन में सोनोग्राफी की जा रही है। जनाना में 100, कैंसर में 50 और मुख्य भवन में 150 सोनोग्राफी प्रतिदिन होती है। मशीनें खराब होने से हर दिन समय अधिक लग रहा है। ऐसे में मरीज निजी लैबों की तरफ रुख कर रहे हैं। ट्रोमा सेंटर और पीबीएम रेडियोलॉजी विभाग के मुख्य भवन में स्थापित एक-एक सोनोग्राफी मशीन पिछले दो महीने से खराब पड़ी है।
केवल दो रेडियोलॉजिस्ट
पीबीएम के रेडियोलॉजी विभाग में रेडियोलॉजिस्ट के सात पद स्वीकृत हैं, जिनमें से दो पद पर ही रेडियोलॉजिस्ट कार्यरत हैं। शेष पद रिक्त पड़े हैं। रिक्त पदों को भरने के लिए राज्य सरकार से कई बार गुहार की जा चुकी है लेकिन आज तक पद नहीं भरे गए हैं।
कोई सुनवाई नहीं
रेडियोलॉजी विभाग में नई तकनीक की चार सोनोग्राफी मशीनों की अत्यंत आवश्यकता है। पिछले चार साल से अधिकारियों को अवगत करा रहा हूं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। वर्तमान में तीन मशीनें कार्यरत हैं। मुख्य भवन में लगी मशीन के कमरे में एससी नहीं हैं। इन हालात यह मशीन कभी भी शटडाउन हो सकती है।
डॉ. जीएल मीणा, विभागाध्यक्ष रेडियोलॉजी
तीन-तीन घंटे तक इंतजार
दो दिन से सोनोग्राफी कराने आ रहे हैं लेकिन नहीं हो रही है। इमरजैंसी मरीजों की कर रहे हैं सामान्य वाले तीन-तीन घंटे तक इंतजार करते रहते हैं। सोमवार की सुबह नौ बजे से यहां बैठे हैं लेकिन दोपहर के डेढ़ बज चुके हैं लेकिन अभी तक सोनोग्राफी नहीं हुई है।
अपुल मिश्रा, मरीज का परिजन
Published on:
15 May 2017 10:07 am
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