
बज्जू. राज्य में साक्षर भारत मिशन के तहत वर्षो से कार्य कर रहे करीब १७ हजार प्रेरकों के लिए अब रोजी-रोटी चलाना मुश्किल हो गया है। मानव संसाधन मंत्रालय ने प्रदेश सहित देश भर में कार्यरत प्रेरकों की सेवा ३१ मार्च को समाप्त कर दी थी।
पहले साक्षरता एवं सतत् शिक्षा अभियान और बाद में साक्षर भारत मिशन के तहत प्रेरक अल्प मानदेय पर कार्य कर अच्छे भविष्य के ताने बुन रहे थे लेकिन उन्हें क्या पता था कि सरकार उनसे नौकरी ही छीन लेगी। राज्य के हजारों बेरोजगार प्रेरकों में सरकार के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है। अब चार जुलाई को जयपुर में रैली निकालकर प्रदर्शन करेंगे।
कांग्रेस सरकार ने खोले थे महात्मा गांधी पुस्तकालय
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वर्ष २०१३ में महात्मा गांधी पुस्तकालय एवं वाचनालयों का भी संचालन लोक शिक्षा केन्द्रों में ही शुरू कर किया था और ५०० रुपए प्रतिमाह अलग से मानदेय भी निर्धारित किया था। वहीं साक्षर मिशन के तहत प्रत्येक प्रेरक को प्रतिमाह दो हजार रुपए मानदेय मिलता था। यह योजना केन्द्र सरकार द्वारा चलाई जा रही थी। इसमें राज्य सरकार का अंश केवल १० प्रतिशत ही था।
पंचायत में दो प्रेरक
साक्षर भारत मिशन के तहत केन्द्र सरकार की आेर से हर ग्राम पंचायत मुख्यालय पर लोक शिक्षा खोले गए थे। इनमें ग्रामसभा में प्रेरकों का चयन किया जाता था जिसमें एक पुरुष प्रेरक व एक महिला प्रेरक को नियुक्ति किया था।
योजनाओं के संचालन में भूमिका
निरक्षर लोगों को साक्षर करना और उनको समतुल्यता परीक्षा दिलवाना, परिवार नियोजन, राष्ट्रीय टीकाकरण, मतदाता निर्वाचन कार्यक्रम, भामाशाह योजना, पेंशन योजना, साक्षर भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना सहित केन्द्र एवं राज्य सरकार की कई कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रेरकों की अहम भागीदारी रही।
4 को जयपुर में रैली
प्रेरक संघ बज्जू के गौडू के राजेन्द्र धायल ने बताया कि इस बारे में कुछ दिन पहले जयपुर में पूर्व मुख्यंमत्री को अवगत करवाया है और राजस्थान सरकार के कई मंत्रियों को अवगत करवाया है। प्रेरकों की सेवा समाप्त करने के विरोध में चार जुलाई को राजस्थान प्रेरक संघ चार जुलाई को जयपुर में रैली निकालकर प्रदर्शन करेगा।
Published on:
04 Jul 2018 08:24 am
