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बीकानेर की उस्ता कला और हस्त कढ़ाई को मिला जीआई टैग, दस साल रहेगा हमारा एकाधिकार

बीकानेर की उस्ता कला, हस्त कढ़ाई कला के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। अब इन उत्पादों पर दस साल तक एकाधिकार रहेगा। सरकारी प्रोहत्साहन मिलेगा। सबसे बड़ी बात लागत से कम दाम नहीं होने दिए जाएंगे।

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बीकानेर की उस्ता कला और हस्त कढ़ाई को मिला जीआई टैग, दस साल रहेगा हमारा एकाधिकार

बीकानेर की उस्ता कला और हस्त कढ़ाई को मिला जीआई टैग, दस साल रहेगा हमारा एकाधिकार

बीकानेर. राजस्थान की पांच पारंपरिक कलाओं जोधपुर बंधेज कला, उदयपुर की कोफ़्तगिरी मेटल शिल्प, राजसमंद की नाथद्वारा पिचवाई शिल्प, बीकानेर की उस्ता कला, बीकानेर की हस्त कढ़ाई कला के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिल गया है। अब इन उत्पादों पर दस साल तक एकाधिकार रहेगा। सरकारी प्रोहत्साहन मिलेगा। सबसे बड़ी बात लागत से कम दाम नहीं होने दिए जाएंगे।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. राजीव सिवाच ने बताया कि विलुप्त हो रही कलाओं को जीवित रखने के लिए नाबार्ड की ओर से इन पांच उत्पादों के जीआई पंजीकरण परियोजना के लिए सहायता प्रदान की गई है। यह परियोजना स्थानीय समुदायों की आय के स्तर को बढ़ा कर उन्हें सशक्त बनाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के पारंपरिक ज्ञान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के संरक्षण के लिए यह परियोजना पूर्ण रूप से सहयोगी रहेगी।

एक हजार लोग जुड़े हैं उस्ता से

बीकानेर की उस्ता कला से अभी एक हजार से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। इस कला को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा भी दिया जा रहा है। खासकर अवार्ड समारोहों में लोग इस कला के उकेरे फ्रेम देते हैं। इसके अलावा तमाम प्रदर्शिनयों और मेलों में भी स्टाल के जरिए उस्ता कला के प्रचार-प्रसार में सरकार भी सहयोग कर रही है। गौरतलब है कि इस कला के सिद्धहस्थ बीकानेर शहर में ही ज्यादा हैं।

तीन ब्लॉक में पांच हजार बुनकर

बीकानेर हैंडीक्राफ्ट को भी जीआई टैग मिला है। यह धागे को बुनकर बनाए जाने वाले बंधनवॉल, सजावटी सामान बनाने वाले बुनकरों के लिए है। खाजूवाला, कोलायत और लूणकरनसर ब्लॉक में इस कार्य से करीब पांच हजार लोग जुड़े हुए है।