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उच्च शिक्षित की बजाय कम शिक्षित की बड़ी सोच, पुरुष नसबंदी में जिला फिसड्डी

सालाना लक्ष्य के मुकाबले में अब तक 105 पुरुष नसबंदी के ऑपरेशन हुए हैं। इनमें भी अशिक्षित व कम पढ़े-लिखे लोगों की संख्या ज्यादा है।

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vasectomy in district

सरकार व स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बावजूद पुरुष नसबंदी में जिले की स्थिति सुधर नहीं रही है। पुरुष नसबंदी के मामले में बीकानेर जिला 18 वें पायदान पर है। हालात यह है कि सालाना लक्ष्य के मुकाबले में अब तक 105 पुरुष नसबंदी के ऑपरेशन हुए हैं। इनमें भी अशिक्षित व कम पढ़े-लिखे लोगों की संख्या ज्यादा है। वहीं गत तीन सालों के आंकड़ों की बात करें तो विभाग लक्ष्य के मुकाबले दस फीसदी आंकड़ा भी नहीं छू पाया है।

स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक वर्ष पुरुष नसबंदी को लेकर न केवल लक्ष्य तय करता है बल्कि शिविर लगाकर जमीनी स्तर पर अपनी पूरी ताकत झोंकने से भी नहीं चुकता। इसके बावजूद आशानुरूप परिणाम नहीं मिल पाते। प्रशासन के विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों तक को पुरुष नसबंदी के लक्ष्य सौंपे जाते हैं। इतने जतन करने के बावजूद कोशिशों को पंख नहीं लग रहे।

शिक्षित भी नहीं आते आगे
नसबंदी कराने में पढ़े-लिखे लोगों की बजाए महज साक्षर, पांचवीं, आठवीं और 12 वीं तक पढ़े लिखे लोग ही नसबंदी कराते है। इस साल के आंकड़ों की गहराई में जाने पर सामने आया कि अशिक्षित और 12 वीं तक पढ़े लिखे 77 पुरुषों ने नसबंदी कराई। जबकि स्नातक व स्नातकोत्तर वाले 28 लोगों ने ही नसबंदी ऑपरेशन कराया। इसी प्रकार अशिक्षित और 12 वीं तक पढ़े लिखे 6559 महिलाओं ने नसबंदी कराई जबकि स्नातक व स्नातकोत्तर वाली 1953 महिलाओं ने ही नसबंदी कराई।

हकीकत से रूबरू कराते आंकड़े
नसबंदी को लेकर विभाग के आंकड़े हकीकत से रूबरू करा रहे हैं। वर्ष 2014-15 में महिला नसबंदी के 18,198
का लक्ष्य दिया गया। जिसके मुकाबले 54.77 फीसदी लक्ष्य पूरा किया जा सका। दूसरी तरफ पुरुष नसबंदी के 2020 लक्ष्य के मुकाबले केवल 7.97 ही प्रगति रही। साल 2015-16 में 14,087 महिलाओं के लक्ष्य के मुकाबले 9165 नसबंदी की गई। वहीं पुरुष नसबंदी के 1565 लक्ष्य के मुकाबले 137 पुरुषों का ऑपरेशन किया गया। इस वर्ष 2016-17 में विभाग को 12,855 महिलाओं और 1428 पुरुषों की नसबंदी का लक्ष्य मिला हुआ है।

लोगों का रुझान कम

पुरुष नसबंदी के प्रति लोगों का रुझान कम है। विभाग की ओर से आमजन को जागरूकता के लिए प्रचार-प्रसार किया जाता है लेकिन, फिर भी नतीजे आशानुरूप नहीं मिल रहे हैं। इसी वजह से प्रदेशस्तर पर नसबंदी में बीकानेर जिला १८वें नंबर पर है।
डॉ. राधेश्याम वर्मा, उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी

प्रोत्साहन राशि भी नहीं बढ़ा पाई आंकड़ा
पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रोत्साहन राशि भी देती है। परन्तु इसका भी कोई असर नहीं हुआ है। पुरुषों को नसबंदी कराने पर दो हजार और महिला नसबंदी पर 1400 रुपए दिए जाते हैं। सरकारी नुमाइंदों को भी आमजन को नसबंदी कराने पर प्रोत्साहित करने के लिए लगाया जाता है। कर्मचारियों को नसबंदी पर बतौर प्रोत्साहन दो वेतनवृद्धि का लाभ दिया जाता है। फिर भी पुरुष नसबंदी के आंकड़े नहीं बढ़ पाए।

ये गिनाए कारण
- पुरुषों के मन मे कई तरह की भ्रांतियों का पनपना।
- पुरुष प्रधान मानसिकता से बाहर नहीं निकलना।
- समाज में जागरूकता की कमी
- प्रचार-प्रसार में स्वास्थ्य विभाग की असफलता।