
पीबीएम से संबद्ध टीबी अस्पताल के सेमिनार हॉल की गुरुवार दोपहर में पटिट्टयां गिर गई। गनीमत रही कि यह हॉल करीब छह माह पहले ही सार्वजनिक निर्माण विभाग ने असुरक्षित घोषित कर बंद करवा दिया था, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। हादसे की सूचना मिलने पर अस्पताल प्रभारी डॉ. माणक गुजरानी और श्वसन रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गुंजन सोनी मौके पर पहुंचे।
टीबी अस्पताल के सेमिनार हॉल की गुरुवार दोपहर करीब ढाई बजे 40 पट्टियां भरभरा कर गिर गई। पट्टियां गिरने से हुए जोरदार धमाके से एकबारगी अफरा-तरफी मच गई। धूल-मिट्टी के गुबार से वार्डों में मरीजों और परिजनों को परेशानी हुई। धमाके की आवाज सुनकर मरीजों के परिजन व स्टाफ दौड़कर अस्पताल से बाहर निकल गए। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने उच्चाधिकारियों को सूचना दी।
वर्षों पुराना भवन
टीबी अस्पताल का निर्माण लगभग 1937 में हुआ। अब 80 साल बाद अब यह यह भवन जर्जर हालत में तब्दील हो रहा है। पूर्व में भी यहां लैब संचालित होने वाले कमरे की पट्टियों में दरारें आ गई। तब अस्पताल प्रशासन ने लोहे की एंगलें लगाकर काम चलाया लेकिन पार नहीं पड़ी। आखिर बाद में छत को आरसीसी से बनाना पड़ा।
बल्लियों के सहारे पट्टियां
टीबी अस्पताल में लैब के पास एक और कमरा है, जिसकी पट्टियों में भी दरारें आई हुई है। उस कमरे की पट्टियों को भी बल्लियों के सहारे पर टिकाया हुआ है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार टीबी अस्पताल के भवन को बार-बार मरम्मत कराकर काम लिया जा रहा है। यही हालात रहे तो किसी दिन बड़ा हादसा होने की आशंका है।
इनका कहना है...
सेमिनार हॉल को पीडब्ल्यूडी ने असुरक्षित घोषित कर दिया था। तब से उसे ताला लगाकर बंद कर दिया गया। गुरुवार दोपहर को सेमिनार हॉल की 40 पट्टियां गिर गई लेकिन कोई हादसा नहीं हुआ। सेमिनार हॉल करीब छह माह से ताला लगाकर बंद कर रखा था।
- डॉ. गुंजन सोनी, विभागाध्यक्ष श्वसन रोग टीबी अस्पताल
Published on:
22 Sept 2017 01:12 pm
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