
बीकानेर. राजस्थान पत्रिका के चेंजमेकर अभियान में जन एजेण्डा २०१८-२३ की गुरुवार को पत्रिका ऑडियोरियम में हुई विषय विशेषज्ञों की बैठक में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में आधारभूत विकास नहीं होने की बात कही गई। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, बिजली, आवास और रोजगार की समस्या का मुद्दा शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में समान रूप से उठाया गया। बीकानेर जिला औद्योगिक विकास, शिक्षा, परिवहन के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ बताया गया।
विशेषज्ञों ने कहा कि जिले में खनिजों की भरमार है और इन पर आधारित औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं। राज्य में कृषि जिन्सों के उत्पादन एवं व्यापार में बीकानेर राज्य में अग्रिम जिलों में से एक है। यहां मेगा फूड पार्क की मांग अर्से से रही है। बीकानेर शहर का ज्वैलरी व्यवसाय परम्परागत रूप से संचालित हो रहा है। यहां ज्वैलरी मार्केट बने। सिरेमिक्स हब, ऊन-गलीचा आधारित उद्योग को सरकार का समर्थन मिलने की जरूरत है। बीकानेर में पर्यटन विकास की संभावनाएं है।
बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल में सभी संसाधन होने के बावजूद प्रभावी निगरानी व्यवस्था नहीं होने से संसाधनों को पूरा लाभ रोगियों को नहीं मिल पाता है। कॉलेज शिक्षा मे विवि के नियमों की पालना नहीं होती। चुनाव में प्रत्याशी के लिए भी योग्यता के मानदण्ड होने चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं के मानदण्ड स्वास्थ्य केन्द्रों में पूरे नहीं होते।
शहर एवं गांवों में अपना मकान नहीं होने की समस्या है। जिले में विकास के मुद्दे पर दो दशकों में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। शहर में एलीवेटेड रोड, सूरसागर, रेलवे बाइपास, सीवरेज, ड्रेनेज और जन स्वास्थ्य स्वच्छता बड़ी समस्याएं हैं। सौर ऊर्जा हब, गैस पाइप लाइन, रेलवे वर्कशॉप में नए कामों की स्वीकृति के पुराने मु²े यथावत हैं। वहीं राजस्थानी भाषा को मान्यता, उद्योग, कृषि बागवानी, नहरी क्षेत्र का विकास नहीं होना इलाके की बड़ी संमस्याएं हैं।
ये विशेषज्ञ हुए शामिल
डॉ. अजय कपूर, प्रो. एसबी पुरोहित, डॉ. मंजूलता शर्मा, प्रो. एलएन खत्री, लूणकरन छाजेड़, उद्यमी कमल कल्ला, अरुण गुप्ता।