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मिट्टी और ईंधन महंगा होने से बढ़े मटकियों के दाम, शहर में 130 रुपए तक हुई कीमत

खरीदारी ने जोर पकड़ा, बढ़ी मिट्टी के बर्तनों की मांग

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नगर स्थापना दिवस को लेकर शहर में मिट्टी के बर्तनों की खरीद शुरू हो गई है। स्थापना दिवस पर घर-घर परिण्डे में नई मटकियों के पूजन की परम्परा के तहत मटकियों की खरीद हो रही है। साथ ही मिट्टी से बनी लोटड़ी, हाण्डी, ढकणी, पालसिए भी खरीदे जा रहे हैं। हालांकि इस बार मटकियों के बढ़े भाव बढ़ गए हैं, जिससे खरीद पर असर पड़ रहा। 'गरीबों का फ्रिज' कहे जानी ये मटकियां गरीब लोगों के लिए खरीदना भी मुश्किल हो गया है।

बाजारों में मटकियां 80 रुपए से लेकर 130 रुपए प्रति नग के हिसाब से बिक रही हैं। वहीं छोटी मटकियां 60 से 90 रुपए प्रति नग बिक रही हैं। मिट्टी से बने बर्तनों के भावों में गत वर्ष की तुलना में इस बार करीब 15 फीसदी की वृद्धि हुई है। भाव बढऩे का असर बड़े आकार की मटकियों की खरीद पर पड़ रहा है। लोग छोटे आकार और सीमित संख्या में ही मटकियां खरीदने को तवज्जो दे रहे हैं।

सार्दुल सिंह सर्किल पर इस व्यवसाय से जुड़े दुलीचंद कुम्हार बताते है कि गंगाशहर, उदयरामसर, नापासर, आंबासर तथा महाजन की मटकियां महंगी हुई है। हाण्डी, ढ़कणी, लोटड़ी के भाव भी दस से पन्द्रह प्रतिशत तक बढ़े है। मिट्टी, मजदूरी और लकड़ी तथा गोबर के उपलों का बुरादा के भावों में हुई बढ़ोतरी का असर मिट्टी से बने बर्तनों पर पड़ रहा है।

प्रति ट्रक 500 रुपए बढ़े
गंगाशहर कुम्हारों का मोहल्ला निवासी केशव प्रजापत ने बताया कि मटकियां बनाने के लिए जिस मिट्टी का उपयोग होता है, उसके भाव प्रति ट्रक 300 से 500 रुपए तक बढ़ गए हैं। वहीं मिट्टी के बर्तन पकाने के लिए जिस लकड़ी और गोबर खाद बुरादा का उपयोग होता है, उसके भावों में भी वृद्धि हुई है। बर्तन बनाने वाले मजदूरों ने भी प्रति नग मजदूरी बढ़ा दी है। इससे मिट्टी के बर्तन महंगे हो गए हैं। गरीब लोग भी शीतल पानी के लिए मटकियां खरीदते हैं। इससे उनकी जेब पर भार बढ़ा है।

बोर्ड मदद को प्रयासरत
मिट्टी से बने बर्तनों के भाव कुछ बढ़े हैं। इसका कारण मिट्टी सहित कच्चे माल, लकड़ी, बुरादा व मजदूरी का बढऩा है। अब भी परम्परागत रूप से मिट्टी के बर्तन बनाए जा रहे हैं, जिससे निर्माण कम होता है और लागत बढ़ जाती है। आधुनिक तरीके से मिट्टी के बर्तन व अन्य चीजों का निर्माण हो, इसलिए इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की सहायता के लिए बोर्ड प्रयासरत है।
सोहन लाल प्रजापत, सदस्य, राज्य माटी कला बोर्ड