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भारी बारिश से बिगड़ा पानी का प्रबंधन, दो लाख क्यूसेक पानी पाकिस्तान छोड़ा

- इंदिरा गांधी नहर परियोजना में हरिके से पानी की आपूर्ति बंद - पोंड महज पांच फीट खाली, इसे भरने पर सतलुज के बांध को खतरा

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भारी बारिश से बिगड़ा पानी का प्रबंधन, दो लाख क्यूसेक पानी पाकिस्तान छोड़ा

भारी बारिश से बिगड़ा पानी का प्रबंधन, दो लाख क्यूसेक पानी पाकिस्तान छोड़ा

पंजाब व हरियाणा में भारी बारिश के बाद इंदिरा गांधी नहर परियोजना में जलापूर्ति शून्य कर दी गई है। नहर में पानी की आपूर्ति बंद करने की एक वजह हरिके बैराज पर आ रहे बारिश के पानी से पानी नियंत्रण सिस्टम के बिगड़ने का खतरा पैदा हो गया है। हरिके बैराज का पोंड लेवल अभी पांच फीट खाली है लेकिन, इसमें पानी संग्रहण नहीं किया जा रहा। सुरक्षा कारणों से सतलुज से आ रहे करीब दो लाख क्यूसेक पानी को हरिके से नीचे पाकिस्तान की तरफ गेट खोलकर छोड़ दिया गया है जो हुसैनीवाला हैड होकर पाकिस्तान जा रहा है। जल संसाधन विभाग के अधिकारी भारी बारिश से उपजे हालात पर नजर रखे हुए है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पानी की आपूर्ति बंद होने का सीधा असर राजस्थान के 10 जिलों पर पड़ रहा है। हालांकि अभी नहर में कुछ पानी चल रहा है और इसमें जलकुंभी तैरती नजर आ रही है। यह हरिके से पहले चलता रहा पानी है। जो पौंड के किनारों को काटकर आ रहा था। इसी वजह से जलकुम्भी आई है। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता प्रदीप रुस्तगी ने बताया कि बुधवार को हरिके पर 1 लाख 90 हजार क्यूसेक पानी की आवक हो रही थी। जो पूरा नीचे पाकिस्तान की तरफ जाने के लिए छोड़ा जा रहा है। सुरक्षा कारणों से आईजीएनपी व भाखड़ा में पानी प्रवाह बंद कर दिया गया है। पानी पाकिस्तान नहीं छोड़ने पर सतलुज पर बने बांध के टूटने का खतरा पैदा हो जाता है। जिससे पूरा क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा। िस्थति पर नजर रखे हुए हैं। जैसे ही हरिके पर पानी की आवक घटेगी नहरों में पानी छोड़ा जा सकेगा। अभी मसीतावाली हैड के पास आरडी 629 पर अधिकारी नजर रखे हुए हैं। घंग्घर में आ रहे पानी से निपटने के लिए विभाग तैयारियों में जुटा हुआ है।


एक्सपर्ट व्यू---सुभाष सहगल, नहरी पानी तंत्र एक्सपर्ट
हर चौथे साल यही परेशानी झेलते आ रहे
तीन-चार साल के अंतराल के बाद हमे ऐसी िस्थति का सामना करना पड़ता है, जब हमारी नहरों को बंद कर पाकिस्तान पानी छोड़ना मजबूरी हो जाती है। इससे पहले भी वर्ष 2006, 2013, 2019 में ऐसी िस्थति पैदा हो चुकी है। इसके बावजूद राजस्थान और पंजाब सरकार चेत नहीं रही। मुख्य कारण यह है कि भाखड़ा बांध से रोपड़ हैडवर्क्स के बीच का 40 किलोमीटर एरिया में जो पहाडि़यां हैं, उनमें जब भी भारी बारिश होती है, तो रोपड़ से नीचे पानी छोड़ा जाता है। यहां से नीचे सतलुज नदी का प्रवाह क्षेत्र में चार लाख 90 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने का डिजाइन है। परन्तु इसमें फिरोजपुर से जलंधर रेलवे लाइन व नेशनल हाइवे व स्टेट हाइवे नदी के ऊपर से पुलों से गुजरते है। उनकी साफ-सफाई नहीं होने से जलंधर के गांव व फिरोजपुरा जिले के गांव डूबते हैं। इस बारे में संत सींचेवाल ने फरवरी 2020 में रेलवे के छह पिल्लरों के नीचे साफ-सफाई कराई थी। नदी पर रेलवे के 21 खंड है। पांच-छह को छोड़कर शेष चॉक हुए पड़े हैं। जिससे पानी आगे पानी नहीं निकल पाता है। खामियाजा राजस्थान को भुगतना पड़ता है।

अच्छी आवक से पौंग बांध का लेवल 28 फीट बढ़ा
बांधों के जल ग्रहण क्षेत्रों में मानसून के सक्रिय होने की वजह से पौंग बांध में पानी की आवक लगातार बढऩे से इसका स्तर भी बढ़ रहा है। एक सप्ताह में ही इस बांध में पानी का स्तर 28 फीट के करीब बढ़ गया है। तीन जुलाई 2023 को पौंग बांध का स्तर 1336.95 फीट था। जो बारह जुलाई को बढ़ कर 1363.96 फीट हो गया। इसी तरह भाखड़ा बांध का जल स्तर क्रमश: 1597 फीट से बढकऱ 1628 फीट हो गया इस तरह भाखड़ा बांध का जल स्तर 31 फीट बढ़ गया है। सुरक्षा की दृष्टि से हरिके बैराज का पौंड लेवल मेनटेन किया जा रहा है। इसके तहत हरिके डाउन स्ट्रीम के जरिए हजारों क्यूसेक पानी को रोजाना पाकिस्तान क्षेत्र में प्रवाहित किया जा रहा है। ताकि भविष्य में बांधों के आसपास पानी की आवक बढऩे पर संभावित बाढ़ के खतरे से बचा जा सके।


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