
दूध उत्पादन में राजस्थान टॉप पर, 'आधी दुनिया' ने बदली 'पूरी तस्वीर'
देशभर में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाला राज्य हमारा राजस्थान बन गया है। केन्द्र सरकार के पशुपालन और मत्स्य विभाग की ओर से जारी किए गए 'बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी-2022' के नवीनतम आंकड़ों में यह सुखद तस्वीर निकलकर सामने आई है। प्रदेश ने देश का 15.05 प्रतिशत दूध उत्पादन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया है। दूूध उत्पादन की इस तस्वीर को बदलने में व्यावसायिक के साथ घरेलू डेयरियों में जुटी महिलाओं का बड़ा योगदान है। इससे महिलाओं ने अपनी परिवार को आर्थिक मजबूती भी प्रदान की है। ग्रामीण क्षेत्रों के डेयरी फार्म में सुबह से देर शाम तक महिलाएं इस काम को संभाल रही हैं। हालांकि पिछले वर्ष लम्पी से दूध उत्पादन लड़खड़ाया, लेकिन अब फिर से नवाचार के साथ दुग्ध अर्थव्यवस्था पटरी पर आ गई है।
---यूपी, एमपी और गुजरात को पीछे छोड़ा
वर्ष 2021-22 के दौरान देश में कुल दूध उत्पादन 221.06 मिलियन टन रहा। शीर्ष पांच प्रमुख दूध उत्पादक राज्यों में राजस्थान 15.05 प्रतिशत के साथ प्रथम, उत्तर प्रदेश 14.93 प्रतिशत के साथ द्वितीय, मध्य प्रदेश 8.06 प्रतिशत के साथ तृतीय, गुजरात 7.56 प्रतिशत के साथ चौथे व आंध्र प्रदेश 6.97 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर रहा।---
देश में 5.29, विश्व में महज 1.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धिराजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार धूड़िया ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में दुग्ध उत्पादन में देश में 5.29 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई। जबकि विश्व में इसकी वृद्धि दर सिर्फ 1.3 प्रतिशत है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत के महत्वपूर्ण योगदान के साथ डेयरी क्षेत्र लाखों ग्रामीण परिवारों को रोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहा है।
---दूध : ग्लोबल फूड
एक जून को विश्व दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद् और कृषि संगठन (एफ.ए.ओ.) की ओर से दूध को ग्लोबल फूड के रूप में महत्व प्रदान करने के लिए यह दिन समर्पित है।---
गर्व कराते आंकड़े : प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता में भी हम अव्वल280 ग्राम प्रति दिन प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता अनुमोदित है डब्ल्यूएचओ की ओर से
444 ग्राम प्रति दिन प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता है देश में870 ग्राम प्रति दिन प्रति व्यक्ति उपलब्ध है राजस्थान में
---सुविधाएं बढ़े तो दूध उत्पादन को लगे पंख
- निःशुल्क व सस्ती पशु चिकित्सा सेवाएं नियमित रूप से पशुपालकों तक पहुंचे।
- लघु व सीमान्त किसानों को कम ब्याज पर उदार ऋण सुविधाएं मिले।- पर्यावरण व फसल पैटर्न के अनुसार हरे व सूखा चारा उत्पादन क्षेत्रफल को बढ़ाना होगा।
- बिचोलियों का प्रभाव कम कर दूध खरीद के लिए सहकारी समितियों का गठन कर बाजार उपलब्ध करवाएं।- राज्य सरकार पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य व सब्सिड़ी प्रदान करने पर जोर दें।
- प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना पर ध्यान देना होगा।(राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के प्रो. राजेश कुमार धूड़िया के अनुसार)
---ऊंटनी के दूध से किए कई नवाचार
राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र की ओर से कैमल मिल्क से कुल्फी, फ्लेवर्ड दूध, पेड़े, गुलाब जामुन और चॉकलेट जैसे उत्पाद तैयार किए गए हैं। जो स्वास्थ्यवद्धZक भी बताए जाते हैं। कैमल मिल्क पाउडर को पांच अलग-अलग मोटे अनाज में मिश्रित कर रेडी टू ईट फूड भी तैयार कर लिया है।---
इन दो उदाहरणों से समझें महिलाओं का योगदान
केस 1 : गाय के दूध से चल रहा घर खर्च
बज्जू के तेजपुरा निवासी 36 वर्षीय गोमती देवी ने बताया कि उनके घर में 5 पशुधन हैं। घर का सामान्य खर्च भी गाय के दूध से चलता है। बचपन से गोपालन कर रही है। सुबह 5 बजे उठकर काम में जुट जाती है। रोजाना 50 लीटर से अधिक दूध की सप्लाई करते हैं। घर की अन्य महिलाएं और परिवार के सदस्य जुटे रहते हैं।
केस 2 : सुरनाणा को बनाया पशु बाहुल्य गांव
लूणकरणसर से महज 6 किलोमीटर दूर सुरनाणा पशु बाहुल्य गांव है। गांव की 52 वर्षीय तोली देवी ने बताया कि यहां के लोग खेती-बाड़ी व पशुपालन पर निर्भर है। यहां राठी गायें ज्यादा हैं। अच्छी देखभाल करने पर सबसे ज्यादा दूध देती हैं। हमारा घर इसी से चलता है। रोजाना 40 लीटर से अधिक दूध की सप्लाई करते हैं। पशुपालक गोपीराम भुंवाल ने बताया कि दूध उत्पादन में सुरनाणा अग्रणी है।
---एक्सपर्ट व्यू : अब वैज्ञानिक ढंग से गोपालन पर जोर
पिछले कुछ सालों में प्रदेश में वैज्ञानिक ढंग से गोपालन किया जा रहा है। संतुलित आहार, खनिज लवण का उपयोग, समय पर टीकाकरण व बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन भी अधिक दुग्ध उत्पादन का मुख्य कारण है। प्रदेश में पिछले कई सालों से ड्रिप सिंचाई पद्धति के चलन के बाद हरे चारे के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। जिससे पशुपालक हरे चारे को भी पशुआहार में उपयोग लेने लगे हैं। पशुओं को दूध उत्पादन के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रचूर मात्रा में मिल रहे हैं। देशी गोवंश को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं का पशुपालक लाभ उठा रहे हैं।
- प्रो.सतीश कुमार गर्ग, कुलपति, राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर।---
उरमूल डेयरी में प्रतिदिन पहुंच रहा 1.16 लाख लीटर दूध
बीकानेर िस्थत उरमूल डेयरी में इस साल औसतन एक लाख 16 हजार लीटर दूध प्रतिदिन पहुंच रहा है। जबकि पिछले वर्ष 2022-23 में 82704 और 2021-22 में 62956 लीटर दूध खरीदा जा रहा था।
Published on:
01 Jun 2023 08:52 pm
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