
विश्व रंगमंच दिवस
बीकानेर . विश्व रंगमंच दिवस २७ मार्च को मनाया जाएगा। रंगकर्म के क्षेत्र में बीकानेर की भी देश-विदेश में अलग पहचान है। वरिष्ठ रंगकर्मियों के साथ युवा पीढ़ी भी इस क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय है, लेकिन रंगकर्मियों को आज भी संसाधनों की कमी खल रही है। विश्व रंगमंच दिवस पर वरिष्ठ रंगकर्मियों
का मन टटोला तो तकनीकी खामियों, संसाधनों का अभाव सामने आया।
रंगकर्मियों का कहना है कि लंबे संघर्ष के बाद कहने को तो रवीन्द्र रंगमंच के रूप में नया और भव्य रंगमंच मिल गया है, लेकिन तकनीकी रूप से देखा जाए तो यहां प्रकाश व्यवस्था में खामियां है, तो उपयुक्त उपकरणों का अभाव है। बनावट को लेकर भी रंगकर्मी खुश नहीं है। इसके अलावा एक दिन का शुल्क इतना कि हर रंग संस्था के लिए इसको वहन करना आसान नहीं है।
खामियां हो दूर
वरिष्ठ रंगकर्मी ओम सोनी ने बताया कि आज नाटक हो भी रहे हैं और दर्शक भी जुट रहे हैं। लोगों में रंगकर्म के प्रति रुझान भी बढ़ रहा है। इसमें युवाओं की भागीदारी भी बढ़ती जा रही है। यह भी सच्चाई है कि बीकानेर में अर्से बाद एक रंगमंच मिला, लेकिन यह खामियों से भरपूर है। इनको समय रहते दूर किया जाना चाहिए। साथ ही इसका शुल्क आम रंगकर्मी की पहुंच में होना चाहिए।
नवांकुरों से उम्मीद
वरिष्ठ रंगकर्मी एसडी चौहान का मानना है कि थिएटर फेस्टिवल सरीखे आयोजन से बीकानेर ने राष्ट्रीय स्तर पर धाक कायम की है। आने वाला समय नवांकुरों से उम्मीद रखता है। सात दशक पूर्व का दौर पारसी नाटकों की संध्या का काल था। उस समय आधुनिक कहे जाने वाले 'सामाजिक नाटकोंÓ का उद्भव होने लगा था।
साल 2000 के आसपास प्रयोगधर्मी नाटकों का दौर आया और इसके साथ रंग दर्शक भी दूर होने लगे, रंगकर्मी खेमों में बंट गए थे। इसी उठा-पटक में रंगकर्मियों की तीसरी पीढ़ी फिर उत्साह के साथ कुछ रचनात्मक करने को अग्रसर हुई जरूरी पर अनुदान आधारित रंगकर्म कभी-कभी निराश करता है।
खुद में हो भाव
युवा रंगकर्मी नवल किशोर का कहना है कि रंगकर्म कभी आपकी हाजिरी में हाजिर नहीं होता है, बल्कि आपको खुद में आग्रह का भाव लेकर रंगमंच तक आना होता है। मंच पर रचित ये संसार चिर स्थाई नहीं होता, फिर भी हर छोटे-बड़े शहर में हो रहा है और ललक, कसक व अपनी अद्भुत ठसक के साथ जो इसमें डूबे हैं, वे रसमय है, आनंदमय हैं।
हो रहा है मंचों में इजाफा
रंगकर्मियों के लिए सुखद यह है कि बीकानेर में रंगमंच की संख्या में इजाफा हो रहा है। रवीन्द्र रंगमंच के साथ टीएम ऑडिटोरियम, रेलवे प्रेक्षागृह, धरणीधर रंगमंच, ओपन एमी थियेटर, हंसा गेस्ट हाउस, न रेन्द्र ऑडिटोरियम भी ऐसे मंच हैं, जहां नाटकों का मंचन होता रहता है।
Published on:
27 Mar 2018 11:24 am
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