
स्वस्थ जीवन का मूल आधार प्राकृतिक चिकित्सा
बीकानेर. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र, कृषि विश्वविद्यालय परिसर बीछलवाल में आयोजित दो दिवसीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रशिक्षण शिविर मंगलवार को सम्पन्न हुआ। केन्द्र निदेशक डॉ. देवाराम काकड़ ने जल नेति, रबड नेति, कुंजल, गरारे आदि क्रियाओं का अभ्यास करवाते हुए कहा कि श्वसन प्रणाली को ठीक रखने और नासिक के मार्ग से विषाक्त पदार्थो को दूर करने के लिए जन नेति क्रिया का अभ्यास किया जाता है। इससे सर्दी, जुकाम, वायरस जनति रोगों की तकलीफ में आराम मिलता है। वर्तमान में कोरोना काल में भी रोगियों को जलनेति, गरारे, कुंजल आदि से लाभ मिला है। शिविर के आज दूसरे दिन शिविरार्थियों को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिये विशेष जानकारी दी गई। योग शिक्षक दीपक चांवरिया, मनीष बाजिया,अपरिजिता राव, आरती ने योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा की जानकारी दी। रविन्द्र राव ने तनाव मुक्ति के लिए शवासन का अभ्यास करवाया।
योग इन्द्रिय व मन के नियंत्रण करने की प्रणाली : शिविर के दौरान रामकृष्ण संघ के सन्यासी स्वामी व्रजमोहनानंद महाराज ने कहा कि योग कठिन प्रयासों के माध्यम से मानव प्रकृति के भिन्न-भिन्न तत्वों के अनुशासन के माध्यम से इन्द्रिय व मन को नियंत्रण करने की प्रणाली है। योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा क्रियाओं से मनुष्य शारीरिक व मानसिक रूप से खुद को स्वस्थ रख सकता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रकृति का एक हिस्सा है और प्राकृतिक जीवन जीने वाला मनुष्य स्वस्थ निरोगी जीवन प्राप्त कर सकता है।
Published on:
11 Aug 2021 06:16 pm
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