28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर गीता के करीब हो रहे युवा

- सात महीने से चल रहा कारवां - गीता, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के अलावा कंठस्थ करने की भी चल रही प्रतिस्पर्द्धा - 10 बच्चों से 250 पहुंची संख्या

2 min read
Google source verification
मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर गीता के करीब हो रहे युवा

मोबाइल की आभासी दुनिया से दूर गीता के करीब हो रहे युवा

जयप्रकाश गहलोत/बीकानेर. आज जब अधिकांश युवा दिनभर अपनी अंगुलियां मोबाइल के की बोर्ड पर फिराते रहते हैं। ऐसे में बीकानेर में एक स्थान ऐसा भी हैं, जहां किशोर व युवा सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से दूर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और गीता के अध्याय को कंठस्थ करने में जुटे हुए हैं। इन्हें तन्मयता से ऐसा करते देख आसपास के अन्य किशोर भी इस ओर झुकाव दर्शाने लगे हैं। दरअसल, यह दृश्य साकार हुआ है श्री मुरली मनोहर गीता संस्थान की पहल से, जिन्होंने युवाओं को सोशल मीडिया व बुरी आदतों से दूर रखने की एक सकारात्मक कोशिश की है। संस्थान की ओर से सप्ताह में एक दिन शनिवार को मुरलीमनोहर मैदान में सुंदरकांड एवं रविवार को गीता के अध्याय का वाचन कराया जाता है। बाकायदा स्कूल की भांति कक्षाएं भी लगती हैं। इस दिव्य कर्म के प्रणेता स्वामी रामसुखदास जी महाराज बने।

30 किशोर कर रहे अध्ययन

मुरली मनोहर धोरा पर इस समय 30 किशोर गीता के अध्याय सीखने-समझने के लिए आ रहे हैं। हर रविवार सुबह नौ से दोपहर दो बजे तक कक्षाएं लगती हैं, जिसमें किशोरों को गीता के अध्याय कंठस्थ कराया जाता है। महाराज किशनदास एवं श्यामसुंदर इसका अभ्यास करवाते हैं। इसी क्रम में रानीबाजार के पंचमुखा हनुमान मंदिर में मयंक गहलोत हनुमान चालीसा व सुंदरकांड के पाठ करवाते हैं। रोजाना गीता अध्याय कंठस्थ कराने की कक्षा लगती है। शाम छह से आठ बजे तक नियमित कक्षाएं चलती हैं। यहां 25 किशोर रोजाना गीता, सुदंरकांड पाठ व हनुमान चालीसा का अभ्यास करने आते हैं।

100 किशोर कंठस्थ कर चुके गीता

करीब सात महीने पहले किशारों को धर्म का ज्ञान कराने के उद्देश्य से शुरू की गई गीता, हनुमान चालीसा, सुंदरकांठ के पाठ कंठस्थ कराने की योजना अब फलीभूत हो रही है। अब तक यह संस्था 100 किशोरों को गीता, 175 को हनुमान चालीसा एवं 135 को सुंदरकांठ का पाठ कंठस्थ करवा चुकी है।

किशोरों को करते हैं पुरस्कृत

संस्था की ओर से किशारों की प्रतिस्पर्द्धा भी कराई जाती है। गीता का एक अध्याय कंठस्थ करने वाले किशोर को गीता, नौ अध्याय कंठस्थ होने पर एक चांदी का मेडल और गीता के पूरे अध्याय कंठस्थ होने पर इनाम स्वरूप साइकिल दी जाती है। अब तक 100 किशोर-किशोरियां गीता को कंठस्थ कर चुके हैं।