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वनमाली सृजन पीठ में कविता की एक शाम का आयोजन, खुरदुरी व ठहराव की कविताओं में होता है चिंतन- संतोष

साहित्यकार संतोष चौबे, लीलाधर मंडलोई व राम कुमार ने किया अपनी रचनाओं का पाठ

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वनमाली सृजन पीठ में कविता की एक शाम का आयोजन, खुरदुरी व ठहराव की कविताओं में होता है चिंतन- संतोष

वनमाली सृजन पीठ में कविता की एक शाम का आयोजन, खुरदुरी व ठहराव की कविताओं में होता है चिंतन- संतोष

बिलासपुर। वनमाली सृजन पीठ में "कविता की एक शाम" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें आकाशवाणी और दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक और नया ज्ञानोदय के पूर्व संपादक और वरिष्ठ साहित्यकार लीलाधर मंडलोई , साहित्यकार रामकुमार ने अपनी कविताओं का पाठ किया।


साहित्यकार रामकुमार ने अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए कविता पढ़ी। जो आनंद आज की व्यस्ततम जीवन शैली में खत्म होती नजर आ रहा है। इसी तरह उन्होंने प्रेम का 18 सर्ग , यह रात, खुशामदीद, हर कोई कहता है मेरा प्रेम सच्चा है, प्रेम की नागरिकता, सहित कई कविताओं का पाठ किया। इस अवसर पर रचनाकार रामकुमार जी ने अपनी परछाई पर लौटता हूं चुपचाप, जीवन होता, अपना अपना पाठ, यह समय मेरा है , एक पाठ के बीच में, जाग रहा है मौन , समुद्र तट पर , वह कितना अलग... कविताएं सुनाएं। इस अवसर पर डॉक्टर सी वी रमन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और साहित्यकार एवं रचनाकार संतोष चौबे ने अपनी कविताओं का भी पाठ किया. जिसमें दक्षिण से देखोगे तो हम मध्य में दिखेंगे....और आदिवासियों के की स्थिति को दर्शाती विस्थापन कविता का भी पाठ किया । उन्होंने कंप्यूटर विषय पर भी अपनी कविता सुनाई। इस अवसर पर संतोष चौबे ने रामकुमार की कविताओं की समीक्षा करते हुए अपनी बात रखी । चौबे ने कहा कि कविता में खुरदुरापन और ड्रामा होना चाहिए वह सपाट नहीं होनी चाहिए. यदि वह सपाट हुई तो हम उससे सीधे गुजर जाएंगे . जबकि खुरदुरा और ड्रामा युक्त कविताओं पर व्यक्ति का ठहराव होता है । ठहराव से ही व्यक्ति रुकता है ,और वह सोचने पर मजबूर होता है । इस अवसर पर वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष सतीश जायसवाल जी ने कहा कि रविंद्र नाथ टैगोर ने जो कल्पना शांतिनिकेतन को लेकर की होगी वैसे ही कल्पना संतोष चौबे की है। विश्वविद्यालयों के साथ कला साहित्य संस्कृति के क्षेत्र में उनकी दृष्टि से इस बात को प्रमाणित करती है । दृष्टि का विस्तार कितना होना चाहिए, यह संतोष चौबे से सीखा जाना चाहिए। कार्यक्रम में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के डीन डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने भी अपनी बात रखी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव गौरव शुक्ला ने कहा कि पहले शहर के लोग साहित्य से दूर थे। वनमाली सृजन पीठ की स्थापना के बाद से पहले तो लगाओ हुआ और अब हम साहित्य में डूबते जा रहे हैं । यह सब विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे जी ने हमें दिया है, और हम 20 क्रिकेट की तरह भी साहित्य में अपनी जड़ें मजबूत कर इस क्षेत्र में भी कार्य करेंगे। इस अवसर पर आयोजन का आभार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रवि प्रकाश दुबे ने किया। इस अवसर पर डॉक्टर सी वी रमन विश्वविद्यालय के वैशाली के कुलाधिपति डॉ विजय कुमार वर्मा, डॉ चित्रा शर्मा, दूरवर्ती शिक्षा के डायरेक्टर डॉ अरविंद तिवारी, सम कुलपति प्रोफ़ेसर पीके नायक इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ मनीष उपाध्याय, डिप्टी रजिस्ट्रार नीरज कश्यप राकेश मिश्रा लोकेश थिते देवेंद्र यादव आकाशवाणी उद्घोषका अनु चक्रवर्ती डॉक्टर संगीता सिंह, डॉक्टर नमिता भारद्वाज अमित जायसवाल श्वेता पांडे कार्यक्रम का संचालन संज्ञा टंडन ने किया। इस अवसर पर सहित बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के अधिकारी कर्मचारी साहित्य प्रेमी और साहित्य के शोधार्थी उपस्थित थे।