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आयी ऐसी आफत के वर्षों पुराना पीपल पेड़ ढहा, एक घर भी हुआ धराशायी

यहाँ पड़ी मौसम की मार...
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Storms

आंधी तूफान में वर्षों पुराना पीपल पेड़ ढहा, एक घर भी हुआ धराशायी

पथरिया. मानसून के पहले ही मौसम ने अपना मिजाज दिखाना शुरू कर दिया है। बुधवार को अचानक मौसम के करवट बदलने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा है।
समीपस्थ ग्राम बैजना में आए आंधी तूफान से गांव के ही लगभग 60 वर्ष पुराना बरगद का विशाल वृक्ष जड़ सहित उखड़ गया। इसी गांव के एक परिवार का कच्चा मकान भी आंधी के भेंट चढ़ गया। परिवार के सदस्य तो बाल बाल बच गए पर मकान पूरी तरह से ढह गया। परिवार के मुखिया भूखी साहू ने बताया कि आर्थिक कमजोरी के बारण पक्का मकान बनाने में असमर्थ है। कच्चे मकान के ऊपर टीने का शेड लगा कर जीवन व्यापन कर रहा था। बुधवार की शाम आए तूफान ने इसका कच्चा आशियाना भी तबाह कर दिया। भूखी साहू ने जिला प्रशासन से तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग की है। ग्रामवासियों ने भी प्रशासन से राहत पहुंचाने की मांग की है। ग्राम के वरिष्ठ एवम बुजुर्ग नागरिकों ने बताया कि उक्त क्षतिग्रस्त पेड़ उनके बचपन के समय का था। गर्मी के दिनों में ग्रामवासी इसी विशाल पेड़ के नीचे गर्मी के दिनों में राहत पाने बैठा करते थे।

प्री मानसून के इंतजार में लोरमीवासी
इस वर्ष ज्येष्ठ पक्ष दो बार पड़ रहा है। दूसरा ज्येष्ठ अब शुरू हो गया है। नवतपा उतरने के बावजूद भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रहा है। सुबह सूर्य की तेज किरणें तो शाम को बदली ने लोगों को बेहाल करके रखा है। क्षेत्रवासियों को प्री मानसून से राहत मिलने का इंतजार है।
भीषण गर्मी से क्षेत्रवासी परेशान है। सुबह आठ बजते बजते सूर्य की किरणें लोगों को झूलसाने लगती है। जैसे तैसे दिन कटता है। पर शाम को बदली छाने से लोग आशान्वित होने लगते हैं कि प्री मानसून की फूहारें पड़ेंगी और राहत मिलेगी। पर बदली बारिश में नहीं परिवर्तित होती है और जाते जाते उमस भरी गर्मी दे जाती है, जिससे दिन की रही सही कसर पूरा हो जाता है। हालांकि कुछ जगहों पर हल्की-फुल्की बारिश हुई है, लेकिन वे पर्याप्त नहीं है। बढ़ते गर्मी से क्षेत्र में पेयजल संकट भी गहराने लगा है। गांव-गांव में खोदे गए बोर से गंदा व मटमैला पानी निकल रहा है। ट्यूबवेल भी जवाब देना शुरू कर दिया है। सूखे की मार व भीषण आकाल की वजह से पहले से ही क्षेत्रवासी पानी के लिए तरस रहे हंै। कम बारिश व मानसून की दगाबाजी का दंश क्षेत्रवासी झेल ही रहे है, अब नलकूप भी अपना जवाब देना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो पूरे क्षेत्र के 133 ग्राम पंचायतों में लगभग 33 प्रतिशत हेण्डपंपों में गंदापानी तथा जलस्तर कम होने की जानकारी मिल रही है। वनांचल के गांवो में पेयजल संकट एक बड़ी समस्या बन गई है। बैगा आदिवासी कभी झिरीये तो कभी हैण्डपंप से निकला गंदा पानी को ही पीकर काम चला रहे हैं। इधर मानसून की आस में किसान खेतों से खरपतवार हटाना, गोबर खाद डालना जैसे कार्य शुरू कर दिए हैं। खाद, बीज का भण्डारण भी करने लगे हैं।

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