
Bilaspur High Courts decision on the right to education
बिलासपुर. केंद्र सरकार के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए बनाए गए शिक्षा के अधिकार पर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को हाईकोर्ट ने अहम फैसले में राज्य सरकार को आदेश दिए कि निजी स्कूल में भर्ती कराए गए बच्चों या पालकों को रकम नहीं बल्कि उनकी पढ़ाई के काम आने वाली पूरी सामग्री उपलब्ध कराएं।
चीफ जस्टिस टीबीएम राधाकृष्णन व जस्टिस शरद कुमार गुप्ता की डिवीजन बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि इसी शिक्षा सत्र (2017-18) से निजी स्कूलों में पढऩे वाले छात्र-छात्राओं को स्कूलों के माध्यम से मुफ्त गणवेश सहित पढ़ाई की पूरी सामग्री उपलब्ध कराएं।
गौरतलब है कि राज्य सरकार अधिनियम के प्रावधानों में परिवर्तन कर छात्र-छात्राओं को किताब और यूनिफार्म के लिए 650 रुपए दे रही थी, जबकि किताबें, लेखन सामग्री, ड्रेस आदि में पालकों को हजारों रुपए खर्च करने पड़ रहे थे।
ये है याचिका
केंद्र के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुफ्त शिक्षा अधिनियम में राज्य शासन द्वारा परिवर्तन करने को हुडको भिलाई निवासी सीवी भगवंत राव ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
इसमें कहा गया एक्ट में स्पष्ट है 3 लाख से कम वार्षिक आय वालों निशुल्क शिक्षा दी जाए। अधिनियम के दायरे में निजी स्कूलों को भी शामिल किया गया है, इसमें एडमिशन एवं किताब-कॉपी, ड्रेस समेत अन्य सुविधाएं निशुल्क हैं। जबकि राज्य शासन द्वारा नियमों में परिवर्तन कर सिर्फ बीपीएल वर्ग को ही ये सुविधा दी रही है।
Published on:
19 Sept 2017 12:05 am
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