24 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भगवान विष्णु क्षीर सागर गए विश्राम करने, 4 माह तक होगी पूजा-अर्चना

व्यंकटेश मंदिर व लक्ष्मीनारायण मंदिर भजन-कीर्तनसभी देवी-देवताओं का किया जा रहा गुणगान

2 min read
Google source verification

image

Kajal Kiran Kashyap

Jul 06, 2017

pooja

pooja

बिलासपुर. देवशयनी एकादशी से महाप्रभु श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में विश्राम करने चले गए है। एेसे में मांगलिक कार्यक्रमों पर विराम लग गया है। अब मंदिरों में भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो गया है। चार माह तक व्रत-त्योहारों के माध्यम से देवी-देवताओं की पूजा करते हुए उनकी आराधना में भजन-कीर्तन किया जाएगा। मंदिरों में भजन-कीर्तन शुरू हो गया है। भजन मंडलियां शाम होते ही मंदिर परिसर में तबला, मंजिरा, झुनझुना व हारमोनियम की धुन पर भजन गा रहे है।

व्यंकटेश मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, श्री राधाकृष्ण मंदिर, श्री सीताराम मंदिर, श्री राजाराम मंदिर सहित शहर के लगभग सभी मंदिरों में भजन मंडलियां भजन करने पहुंच रही है। शाम से रात तक दो घंटे भजन करते हुए देवी-देवताओं के गुणों का बखान कर रहे है। बुधवार की शाम व्यंकटेश मंदिर में श्रद्धालु व संस्कृत विद्यालय के बच्चे भजन करते नजर आए। मंदिर के महंत डॉ.कौशलेन्द्रप्रपन्नाचार्य ने बताया कि मंदिर में सात दिन भजन-कीर्तन व पाठ का कार्यक्रम होता है। दिन, तिथि व वार के मुताबिक प्रतिदिन अलग-अगल देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर शाम में भजन कार्यक्रम होता है। स्थानीय भजन मंडली व श्रद्धालुओं द्वारा भजन कार्यक्रम किया जाता है।

चार माह है पूजन व श्रवण के लिए खास

लक्ष्मीनारायण मंदिर के पुजारी पंडित अमर शुक्ला ने बताया कि देवशयन से उठने तक की तिथि चार माह की होती है। इस तिथि को विशेष रूप से पूजन की दृष्टि से माना जाता है। इस वजह से इस तिथि में पूजन, भजन-कीर्तन व कथा श्रवण का महत्व होता है। इस दौरान की गई पूजा-अर्चना व कथा श्रवण का विशेष पुण्य मिलता है।

तीर्थ यात्रा करना उत्तम

ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक महाप्रभु विष्णु के शयनकाल के बाद से तीर्थ यात्रा का दौर शुरू हो जाता है। इस दौरान चार धाम की यात्रा व विशेष अनुष्ठान करना पुण्यकारी माना जाता है। इसलिए चार माह के तिथि में ही तीर्थ यात्रा करना उत्तम व पुण्यकारी होता है।

देवउठनी एकादशी 31 अक्टूबर को
देवउठनी एकादशी 31 अक्टूबर को पड़ रही है। इस दिन से मांगलिक कार्यों पर लगा विराम खत्म हो जाएगा। मांगलिक कार्यों की फिर शुरुआत हो जाएगी। इसके बाद से नवंबर और दिसंबर तक शादियों की धूम रहेगी। 14 दिसंबर से मलमास शुरू होने के कारण एक माह के लिए फिर वैवाहिक कार्यक्रम पर विराम लग जाएगा।