असहाय और निर्दोष बच्चों की हत्या की, मृत्यृदंड ही उचित कोर्ट ने कहा कि तीन अबोध- असहाय निर्दोष बच्चे, जिनकी हत्या करने का कोई कारण नहीं था। मात्र पत्नी पर एकपक्षीय चरित्रशंका के कारण वह अपने मनुष्य के रूप में जन्म लेने के बाद जीवन जीने का जो अधिकार मिला था, वह प्राप्त नहीं कर सके। आरोपी ने जिस तरह से अपराध किया गया है उसे देखते हुए सजा कम करने का कोई कारण नहीं है। इसलिए उसको मृत्युदंड देना ही समाज के बेहतर हित में उपयुक्त है।