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Bilaspur News: 6 करोड़ की ‘ड्रीम लाइब्रेरी’ पर ब्रेक, टेंडर के बाद भी जमीन विवाद में फंसी योजना, जानें आखिर क्या है वजह?

CG News: बिलासपुर शहर के बीचों-बीच बनने वाली बहुप्रतीक्षित ‘ड्रीम लाइब्रेरी’ योजना फिलहाल ठहराव का शिकार हो गई है। करीब 6 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और निर्माण एजेंसी भी तय हो गई थी, लेकिन जमीन को लेकर खड़े हुए विवाद ने पूरे प्रोजेक्ट पर ब्रेक लगा दिया है।

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6 करोड़ की ‘ड्रीम लाइब्रेरी’ पर ब्रेक (फोटो सोर्स- पत्रिका)

6 करोड़ की ‘ड्रीम लाइब्रेरी’ पर ब्रेक (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bilaspur News: बिलासपुर के बीचों-बीच बनने जा रही बहुप्रतीक्षित ‘ड्रीम लाइब्रेरी’ फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है। करीब 6 करोड़ रुपए की इस परियोजना को उस समय झटका लगा, जब पशु चिकित्सा विभाग ने अपनी जमीन देने से इनकार कर दिया। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण एजेंसी तय होने के बावजूद अब योजना अटक गई है, जिससे बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रस्तावित एक महत्वपूर्ण सुविधा अधर में लटक गई है।

जमीन देने से किया इनकार

सिटी कोतवाली के पास स्थित शासकीय पशु औषधालय परिसर में अत्याधुनिक लाइब्रेरी बनाने की योजना थी। यह लाइब्रेरी विशेष रूप से बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए तैयार की जानी थी और शहर में अपनी तरह की पहली पहल होती। इसके लिए लगभग 5.78 करोड़ से 6 करोड़ रुपए तक की राशि एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से दी जानी थी।

प्रारंभ में इस प्रोजेक्ट को बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के माध्यम से पूरा किया जाना था, लेकिन बाद में इसे छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंप दिया गया। हाउसिंग बोर्ड ने निर्माण कार्य शुरू करने से पहले संबंधित जमीन के उपयोग के लिए वेटनरी विभाग से एनओसी मांगी, लेकिन विभाग ने जमीन देने से साफ इनकार कर दिया। विभाग का तर्क है कि उक्त भूमि उनके स्वामित्व में है और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे अन्य कार्यों के लिए नहीं दिया जा सकता।

औषधालय उन्नयन भी था योजना का हिस्सा

इस परियोजना में पुराने पशु औषधालय के उन्नयन का कार्य भी शामिल था। इसके तहत बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, डॉक्टर कक्ष, उपचार कक्ष, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को विकसित किया जाना था।

क्या था खास इस लाइब्रेरी में

प्रस्तावित दो मंजिला लाइब्रेरी में करीब 300 लोगों के बैठने की व्यवस्था की जानी थी। इसमें एसी हॉल, स्वच्छ बाथरूम, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और फायर फाइटिंग सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल थीं। बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने और रचनात्मक गतिविधियों की व्यवस्था होती, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए शांत वातावरण में पढऩे, समाचार पत्र और पुस्तकों का विशेष स्पेस बनाया जाना था।

फिलहाल, वेटनरी विभाग की असहमति के बाद यह स्पष्ट है कि वैकल्पिक जमीन के बिना परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस महत्वपूर्ण योजना के लिए नया रास्ता निकाल पाता है या यह फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी।

डॉ. गोपाल शरण सिंह तंवर, ज्वाइंट डायरेक्टर, पशु चिकित्सा सेवाएं, बिलासपुर ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड से एनओसी के लिए प्रस्ताव मिला था, लेकिन विभाग ने जमीन देने से मना कर दिया है।