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पोला पर्व: आधुनिकता के चलते बैल दौड़ मात्र औपचारिकता

पोला का पर्व बैलों को समर्पित किया जाता है। सदियों से बैलों की पूजा की परंपरा चली आ रही है। पोला पर्व का नाम जब आता है तो बैल दौड़ की बात अवश्य आती है

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Kajal Kiran Kashyap

Aug 31, 2016

pola utsav

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बिलासपुर
.पोला का पर्व बैलों को समर्पित किया जाता है। सदियों से बैलों की पूजा की परंपरा चली आ रही है। पोला पर्व का नाम जब आता है तो बैल दौड़ की बात अवश्य आती है। समय बदल गया है और आधुनिकता के चलते बैल दौड़ मात्र औपचारिकता बन गई है। इसके बाद भी आदर्श युवा मंच ने इस परंपरा को बनाए रखने का प्रयास किया है। आदर्श युवा मंच की ओर से श्रीचंद मनुजा की स्मृति में पिछले 16 सालों से बैल दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन लाल बहादुर शास्त्री मैदान में किया जाता है। मंच के अध्यक्ष महेश दुबे ने बताया कि पोला का पर्व हजारों वर्षों से मनाया जा रहा है। बैल दौड़ प्रतियोगिता भी इसमें शामिल है। लेकिन समय बदल रहा है और अब कृषक आधुनिक तकनिक का इस्तेमाल अधिक करते हैं। इसलिए बहुत कम लोगों के पास ही बैल हैं। इसके कारण अब बैल दौड़ औपचारिक हो गया है। परंपरा खत्म न हो इसलिए यह आयोजन मंच के माध्यम से करते हुए कृषकों को उत्साहित करते है।


बाजार छोटा होने से मैदान का अभाव

मंच के अध्यक्ष ने बताया कि बैल दौड़ प्रतियोगिता के लिए ज्यादा जगह की आवश्यकता होती है। पहले बैल दौड़ के लिए अलग सा उत्साह रहता था, लेकिन बाजार बनने से जगह का अभाव हो गया। जिसके चलते बैल दौड़ नहीं हो रही थी सन 2000 में आदर्श युवा मंच ने बैल दौड़ प्रतियोगिता शुरू की है। अब लगातार प्रतियोगिता हो रही है।


विवाद के चलते सभी को बांटते है पुरस्कार

मंच के सचिव केशव बाजपेयी ने बताया कि बैल दौड़ प्रतियोगिता के लिए कृषकों को आमंत्रित करते हैं। इसमें खमतराई, बैमा नगोई, मंगला, उस्लापुर, तिफरा, मोपका, तोरवा जैसे क्षेत्रों से कृषक अपने बैलों को लेकर आते है। बैल दौड़ में कई बार विवाद हो जाता है जिसके चलते पिछले तीन साल से दौड़ कराई जाती है लेकिन इनाम की राशि सभी को बराबर बांट दी जाती है।


बैल सज्जा प्रतियोगिता

बैलों की साज-सज्जा पर पुरस्कार दिया जाता है। इसमें प्रथम, द्वितीय व तृतीय आने वाले बैलों को इनाम देकर पुरस्कृत किया जाता है। इसमें विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होती है।