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नसबंदी कांड : महिलाओं की मौत सिप्रोसिन व आईब्रूफेन से

शासन ने नसबंदी ऑपरेशन में 13 महिलाओं की मौत के लिए स्तरहीन सिप्रोसिन व आईब्रूफेन को कारण बताया और दवा कंपनी को दोषी ठहराया है।

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Chandu Nirmalkar

May 19, 2015

bilaspur vein prisoner scandal

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बिलासपुर. नसबंदी कांड
पर न्यायिक जांच आयोग के समक्ष शासन समेत चार संस्थाओं की तरफ से लिखित में जबाव पेश किया गया है। इसमें शासन ने नसबंदी ऑपरेशन में 13 महिलाओं की मौत के लिए
स्तरहीन सिप्रोसिन व आईब्रूफेन
को कारण बताया और दवा कंपनी को दोषी ठहराया है।


वहीं, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस ने डॉक्टरों, संक्रमित ऑपरेशन थियेटर, गंदगी और संक्रमण को कारण बताया है। नसबंदी न्यायिक जांच आयोग की एकल सदस्यीय अनिता झा के समक्ष सोमवार को शासन की तरफ से हाईकोर्ट के अतिरिक्त महाधिवक्ता आशुतोष सिंह कछवाहा ने 7 पृष्ठों की रिपोर्ट सौंपी। इसमें नसबंदी ऑपरेशन के बाद
13 महिलाओं की मौत
के लिए पूरी तरह से सिप्रोसिन 500 टेबलेट व आईब्रूफेन टेबलेट कारण माना गया है।


इन दवाइयों के सेवन से नसबंदी कराने वाली महिलाओं के अलावा अन्य मरीज भी बीमार पडे़ थे। इसके साथ ही महिलाओं के ऑपरेशन के 24 से 48 घंटे के बीच खाद्य पदार्थ, दवा का सेवन, भोजन करना, पानी में विषैला तत्व होने की ओर भी इंगित किया गया। नसबंदी मामले राज्य शासन की तरफ से बनाए गए नोडल अधिकारी व जिले के सीएमएचओ डॉ. सूर्यप्रकाश सक्सेना भी उपस्थित रहे।


फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट पेश


कावा और कविता फार्मा ने सिप्रोसिन 500 की प्रयोगशाला में जांच रिपोर्ट में भी गड़बड़ी की। कंपनी ने फर्जी कंपनी के सहारे जांच रिपोर्ट पेश की गई। वहीं मुबंई की ब्रांडेड कंपनी का नाम कविता फार्मा ने बिना एमयूओ किए उपयोग किया। यह बात जांच रिपोर्ट में भी सामने आई है। जिस कंपनी के नाम का उपयोग
कविता फार्मा
ने किया था उस कंपनी ने एेसी किसी भी कंपनी को अपने नाम के उपयोग का अधिकार देने से इनकार कर दिया है।


किसी कंपनी से पक्षपात नहीं


नसबंदी घटना
के बाद सिप्रोसिन कंपनी और आईब्रूफेन कंपनी की दवा की जांच प्रयोगशाला में कराई गई। दोनों दवाइयों के बारे में रिपोर्ट शासन की तरफ से पेश की गई है। आईब्रूफेन टेबलेट निर्माता कंपनी उत्तराखंड की है।


दो अन्य ने भी दिए तर्क


कानूनी मार्गदर्शन केंद्र की तरफ से सुधा भारद्वाज ने लिखित तर्क पेश किया। एक अन्य संस्था एचआरएनएल की तरफ से किशोर नारायण ने लिखित तर्क आयोग को सौंपा है।


डॉक्टर, संक्रमित ओटी को कारण


जस्टिस के राष्ट्रीय संयोजक प्रवीण भाई पटेल की तरफ से लिखित में तर्क पेश किया है। पटेल की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि ने यह लिखित तर्क पेश किया। 14 पेश के तर्क में नसबंदी ऑपरेशन में महिलाओं की मौत के लिए सिलसिलेवार ये वजह गिनाई गई। जिसमें पेंडारी का नेमीचंद जैन चेरीटेबल ट्रस्ट ऑपरेशन के लिए निर्धारित मानक का नहीं था, डॉक्टर ने आनन-फानन में महिलाओं के ऑपरेशन किए, ऑपरेशन थियेटर को संक्रमण मुक्त नहीं किया। इससे संक्रमित खून से महिलाएं पीडि़त हुई थीं, ऑपरेशन थियेटर और महिलाओं को जिस कमरे में रखा गया था वह गंदगी थी। ऑपरेशन होने के बाद महिलाओं को वहां रखने लायक स्थान नहीं था आदि शामिल हैं।



नसबंदी मामले की सुनवाई हुई। पक्षकारों ने लिखित में तर्क पेश किया है। अभी इसके लिए कोई नई तारीख तय नहीं की गई है।

अनिता झा, सदस्य,
नसबंदी न्यायिक जांच आयोग, बिलासपुर