
बिलासपुर. वर्तमान में बड़ी संख्या में युवा नशे के आदी होते जा रहे हैं। इससे उनकी सेहत और कॅरियर पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। खपत अधिक होने से अवैध तस्करी भी जमकर हो रही है। इसे रोकने बिलासपुर पुलिस एकतरफा अभियान चला रही हे। निजात अभियान के तहत बीते महीनों में नशे के अवैध व्यपारियों पर ताबड़तोड़ छापामार करवाई की है। इसके अलावा पुलिस नशे के विरुद्ध जन जागरुकता अभियान चलाते हुए लोगों को नशे से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक किसी एक व्यक्ति की नशे की लत से परिवार और समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नशे की लत से बचने का एक मात्र यही तरीका है कि उसे शुरू ही न किया जाए। इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहना ही इसका सर्वोत्तम इलाज है। कम उम्र में ही नशे की गिरफ्त में आ जाने वाले युवा अक्सर क्रिमिनल गतिविधियों में शामिल हो जाते है। बिलासपुर बाल सुधार गृह में भी इस तरह के कई मामले है । ऐसे कई बच्चों का नशा मुक्ति केन्द्रों में इलाज किया जा रहा है। कुछ बीमारियों का इलाज ही बचाव है, जबकि कुछ बीमारियों से बचाव ही उनका इलाज है। नशे की सामग्री व्यक्ति को पहले उत्तेजित करती है, लेकिन उसके नशा इंसान के दिमाग में निगेटिविटी भरती जाती है। इससे वे धीरे-धीरे एन्टीसोशल होने लगते हैं और अपनों के बीच समय बिताना पसंद नहीं करते । नशा सबसे गहरी चोट हमारे आत्मविश्वास पर पहुंचाती है। इससे निराशा का भाव, चिड़चिड़ापन से भरने लगता है जो इंसान के सफलता और जीवन के रोजमर्रा के कामों में बाधक बनता है।
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस का इतिहास
संयुक्तराष्ट्र ने 7 सितंबर, 1987 को समाज को नशा मुक्त करने एक प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव में 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाने की बात की गई थी, जिसे सभी देशों की सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इसके बाद 26 जून, 1989 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया गया। तब से हर साल 26 जून को नशा निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है।
बढ़ रहा केमिकल नशा का ट्रेंड
बीते दिनों में बिलासपुर पुलिस ने अवैध शराब और गांजे के साथ-साथ सॉल्यूशन, नशीली इंजेक्शन, मेथ जैसे कई केमिकल ड्रग पकड़े है। जो दर्शाता है कि बीते सालो में बिलासपुर के युवाओं के बीच केमिकल ड्रग का उपयोग बढ़ा है। बीते दिनों ही बिलासपुर पुलिस द्वारा 6400 नग बुप्रेनोरफिन नाम की प्रतिबधित नशीली इंजेक्शन बेचते एक नशे के सौदागर को पकडऩे में कामयाबी मिली है। इससे दूर रहने पुलिस लगातार बच्चों व युवाओं को निजात कार्यक्रम के माध्यम से जागरूक भी कर रही है।
एक्सपर्ट व्यू....
नए जमाने में एडिस्क्शन शब्द के साथ कुछ नए शब्द भी जोड़े गए हैं जैसे स्मार्टफोन एडिक्शन, पोर्न एडिक्शन, वीडियो गेम एडिक्शन और गैंबलिंग एडिक्शन। कम उम्र के बच्चों में बढ़ता स्मार्ट फोन एडिक्शन काफी घातक साबित हो रहा है। इसके चलते बच्चों में आंख की समस्या, चीजे भूलने की समस्या और अनिद्रा जैसी कई तरह की बीमारियों के चपेट में आते जा रहे हैं। अपने बच्चों को स्मार्टफोन और सोशल मीडिया एडिक्शन से बचाना बेहद जरूरी है।
साइकेट्रिस्ट अनिल कुमार यादव, अपोलो
Published on:
26 Jun 2023 12:07 am
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