
बिलासपुर हाईकोर्ट (photo source- Patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप के मामले में कहा है कि महिला के साथ पूरा पेनिट्रेशन यानी प्रवेश साबित नहीं होता, तो इसे कानून की नजर में रेप नहीं माना जाएगा। ऐसा कृत्य अटेम्प्ट टू रेप यानी रेप की कोशिश की श्रेणी में आएगा।''
कोर्ट ने इसी आधार पर कोर्ट ने रेप के आरोपी की सजा आधी कर दी। आरोपी अब सात साल की जगह साढ़े तीन साल ही जेल में सजा कटेगा। जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा कि आरोपी का इरादा गलत और स्पष्ट था, लेकिन मेडिकल और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरा पेनिट्रेशन साबित नहीं हुआ। इसलिए यह मामला बलात्कार नहीं बल्कि रेप के प्रयास का है।
अपीलकर्ता व शासन की ओर से यह तर्क
अपीलकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया। मेडिकल रिपोर्ट में जबरन यौन संबंध की पुष्टि नहीं होती, क्योंकि पीडि़ता का हाइमन सुरक्षित पाया गया था। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि, बयान दर्ज करने में देरी हुई, स्वतंत्र गवाह नहीं हैं और पीडि़ता की उम्र को लेकर भी स्पष्ट साक्ष्य नहीं हैं। राज्य की ओर से पैनल लॉयर ने ट्रायल कोर्ट के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में पीडि़ता के कपड़ों पर मानव शुक्राणु मिले थे।
यह है मामला
यह मामला धमतरी जिले का है। आरोप के अनुसार 21 मई 2004 को घर मे अकेली पीडि़ता को आरोपी जबरदस्ती खींचकर अपने घर ले गया। वहां उसने पीडि़ता और अपने कपड़े उतारे। उसकी मर्जी के खिलाफ शारीरिक संबंध बनाने की कोशिश की।आरोपी ने पीडि़ता को कमरे में बंद कर दिया। उसके हाथ-पैर बांध दिए और मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। कुछ समय बाद पीडि़ता की मां मौके पर पहुंची और उसे छुड़ा लिया। अर्जुनी थाने में एफआईआर के बाद 6 अप्रैल 2005 को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को 7 साल की सजा सुनाई। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई थी।
Updated on:
19 Feb 2026 09:15 am
Published on:
19 Feb 2026 09:13 am
बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
