
बिलासपुर हाईकोर्ट (photo source- Patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक मामले में आदेश दिया कि भर्ती प्रक्रिया के बीच में अनुभव संबन्धी नियम नहीं बदले जा सकते। कृषि विभाग में संविदा पद के लिए चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर कोर्ट ने माना कि भर्ती प्रक्रिया में मनमानी की गई है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अधिकारी किसी उम्मीदवार के अनुभव प्रमाणपत्र को केवल इसलिए खारिज नहीं कर सकते या उसके अंक नहीं काट सकते क्योंकि वह किसी निजी संस्थान से है, बशर्ते मूल विज्ञापन में सरकारी या अर्ध-सरकारी अनुभव की कोई विशिष्ट मांग न की गई हो।
कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के अंक बहाल करें और मूल मेरिट सूची के आधार पर उसकी नियुक्ति पर विचार करें। 6 मार्च, 2023 को, उप संचालक कृषि-सह-परियोजना प्रबंधक, डब्ल्यूसीडीसी जिला बलरामपुर-रामानुजगंज ने तातापानी माइक्रो वाटरशेड समिति में सचिव के एक अनारक्षित संविदा पद को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था।
याचिकाकर्ता सत्यम गुप्ता ने इस पद के लिए आवेदन किया और अपने शैक्षिक दस्तावेजों के साथ एक निजी संस्थान (मिरर एकेडमी कंप्यूटर एजुकेशन सेंटर) से प्राप्त अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया। याचिकाकर्ता को 67.9 अंकों के साथ पहले स्थान पर रखा गया था, जिसमें उसके अनुभव के लिए दिए गए अंक भी शामिल थे।
कई दौर के दस्तावेज़ सत्यापन के बावजूद तातापानी समिति के लिए अंतिम नियुक्ति को आश्चर्यजनक रूप से विचाराधीन रखा गया। इसके कुछ समय बाद एक नई चयन सूची प्रकाशित की गई जिसमें एक नए उम्मीदवार, दिलीप एक्का को 65.11 अंकों के साथ चयनित घोषित किया गया। चौंकाने वाली बात यह थी कि यह उम्मीदवार प्रारंभिक शीर्ष-तीन मेरिट सूची में था ही नहीं। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता के अनुभव के अंक काट लिए गए जिससे उसका स्कोर घटकर 62.9 अंक रह गया और उसे प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया। इस अचानक किए गए बदलाव को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
न्यायमूर्ति पार्थ प्रतिम साहू की पीठ ने चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाईं। कोर्ट ने देखा कि जब प्रारंभिक मेरिट सूची तैयार की गई थी, तब प्रतिवादी नंबर 4 दिलीप चयन प्रक्रिया की दौड़ में भी नहीं था। कोर्ट ने टिप्पणी की-उपरोक्त तथ्य प्रथमदृष्ट्या दर्शाते हैं कि प्रतिवादी दिलीप एक्का का चयन अवैध साधन अपनाकर किया गया है । कोर्ट ने विज्ञापन की शर्तों की जांच की और अनुभव प्रमाण पत्र के संबंध में राज्य के बचाव को सिरे से खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने सत्यम की याचिका को स्वीकार कर फैसला सुनाया कि याचिकाकर्ता को उसके अनुभव के लिए पहले दिए गए 5 अंकों को वापस जोड़ा जाना चाहिए, जिससे उसका कुल स्कोर पुन: 67.9 अंक हो जाए। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से दिलीप के चयन को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि चयन सूची में उसका सीधा प्रवेश बिना किसी स्पष्टीकरण के था और यह कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है।
Updated on:
25 Feb 2026 12:55 pm
Published on:
25 Feb 2026 12:54 pm
बड़ी खबरें
View Allबिलासपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
