22 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

CG High Court: रेप केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला, सहमति होने पर दुष्कर्म का आरोप नहीं चलेगा…

CG Rape Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पीड़िता अपनी सहमति से आरोपी के साथ गई और संबंध बनाए, तो ऐसे मामले में अपहरण और दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं होता।

2 min read
Google source verification
CG High Court: रेप केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला, सहमति होने पर दुष्कर्म का आरोप नहीं चलेगा...(photo-patrika)

CG High Court: रेप केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला, सहमति होने पर दुष्कर्म का आरोप नहीं चलेगा...(photo-patrika)

CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि पीड़िता अपनी सहमति से आरोपी के साथ गई और संबंध बनाए, तो ऐसे मामले में अपहरण और दुष्कर्म का अपराध सिद्ध नहीं होता। इसी आधार पर अदालत ने विशेष न्यायालय के बरी करने के फैसले को सही ठहराते हुए राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी।

CG High Court: ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार

मामला विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी अत्याचार), रायपुर के 31 अगस्त 2023 के निर्णय से जुड़ा है, जिसमें आरोपी धर्मेंद्र कुमार को अपहरण, दुष्कर्म और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के आरोपों से बरी किया गया था। राज्य शासन ने इस फैसले को चुनौती देते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी।

क्या था मामला

पीड़िता ने 14 जनवरी 2022 को थाना इंदागांव, जिला गरियाबंद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 11 जनवरी को आरोपी उसे मोटरसाइकिल से अपने गांव ले गया और शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी ने कथित रूप से विवाह से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की गई थी।

मेडिकल रिपोर्ट और बयान पर अदालत की टिप्पणी

पीड़िता के मेडिकल रिपोर्ट में शरीर पर किसी प्रकार की आंतरिक या बाहरी चोट नहीं पाई गई। मेडिकल रिपोर्ट में जबरन यौन संबंध की पुष्टि नहीं हो सकी। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि पीड़िता और आरोपी के बीच प्रेम संबंध था। वह अपनी मर्जी से आरोपी के साथ गई थी और कई बार स्वयं मिलने भी गई।

डॉक्टर के समक्ष भी उसने जबरदस्ती संबंध बनाए जाने से इनकार किया था। अदालत में पीड़िता ने यह भी स्वीकार किया कि पुलिस द्वारा लिखी गई रिपोर्ट पर उसने हस्ताक्षर किए थे और बयान पुलिस व परिजनों के कहने पर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट के सिद्धांत का हवाला

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप तभी किया जा सकता है, जब वह पूरी तरह अवैध या असंगत प्रतीत हो। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष अपहरण या दुष्कर्म के आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। चूंकि मुख्य अपराध सिद्ध नहीं हुआ, इसलिए एससी-एसटी एक्ट के प्रावधान भी लागू नहीं होते। इन आधारों पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा।