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कम्पनियां बनाती हैं 30 से 50 डेसिबल वाले हार्न, पर शहर में 150 का हो रहा दुरुपयोग

Bilaspur News: बाइक, कार व भारी वाहन को औरों से अलग व स्टाइलिश बनाने के लिए तेजी से उपयोग हो रहे प्रेशर हार्न ने लोगों की तकलीफ बढ़ा रखी है।

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Companies make horns with 30 to 50 decibels Bilaspur news

कम्पनियां बनाती हैं 30 से 50 डेसिबल वाले हार्न, पर शहर में 150 का हो रहा दुरुपयोग

बिलासपुर। Chhattisgarh News: बाइक, कार व भारी वाहन को औरों से अलग व स्टाइलिश बनाने के लिए तेजी से उपयोग हो रहे प्रेशर हार्न ने लोगों की तकलीफ बढ़ा रखी है। 80 से 150 डेसिबल तक के प्रेशर हार्न लगाकर फर्राटे भरने वाले वाहन चालकों की संख्या लगातार बढ़ते क्रम में है। पूरे मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई करने का हवाला दे रही है।

पुलिस अधिकारियों ने हाई डेसिबल के खिलाफ किया कार्रवाई का दावा

ध्वनि प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण बन चुके प्रेशर हार्न प्रतिबंध के बाद भी लगातार चलने में बने हुए हैं। युवा वर्ग के साथ अपनी वाहन को औरों से अलग दिखाने का शौक पालने वाले 80 से 120 व कुछ तो 150 डेसिबल तक आवाज करने वाले प्रेशर हार्न का उपयोग करने में लगे हुए हैं।

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बहरेपन व हृदयरोग की समस्या बढ़ी

प्रेशर हार्न लगाकर फर्राटे भरने वालों की वजह से एक बड़ा वर्ग काफी परेशान है। प्रेशर हार्न की वजह से जहां बहरे पन व हार्ट अटैक की समस्या आ रही है। वहीं ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ा है।पुलिस अधिकारियों की माने तो प्रेशर हार्न लगाकर फर्राटे भरने वाले वाहन चलाकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।

ध्वनि को लेकर चार जोन में बांटा गया है

भारत सरकार ने ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम के लिए चार भाग में शहर को बांट रखा है। साइलेंट जोन 40 डेसिबल, रेसिडेंटल एरिया 55 डेसिबल, कमर्शियल एरिया 65 व इंडस्ट्रीज एरिया में 50 से 55 डेसिबल होना चाहिए। बावजूद इसके प्रेशर हार्न का धड़ल्ले से इस्तेमाल करने वाले नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 80 से 120 व 150 डेसिबल तक के हार्न का उपयोग कर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।

ध्वनि प्रदूषण को लेकर गाइड लाइन बनी हुई है, 80 से 100 डेसिबल तक के प्रेशर हार्न की वजह से लोगों को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ता है। नियम के अनुसार तय डेसिबल का उपयोग करना चाहिेए। - राजेन्द्र प्रसाद वासुदेव, वैज्ञानिक छ.ग पर्यावरण सरंक्षण मंडल क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर।

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