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आंधी-बारिश में पेड़ गिरने से मौत पर मिलेगा 4 लाख का मुआवजा, प्राकृतिक आपदा पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

High Court Compensation Order: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि आंधी, तूफान और तेज बारिश के दौरान पेड़ से गिरकर हुई मौत भी प्राकृतिक आपदा मानी जाएगी।
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Natural Disaster Compensation

प्राकृतिक आपदा पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (photo source- Patrika)

Natural Disaster Compensation: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्राकृतिक आपदा से होने वाली मौतों पर मुआवजा देने की राज्य सरकार की नीति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति आंधी, तूफान या तेज बारिश जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों के दौरान पेड़ से गिरकर जान गंवा देता है, तो ऐसी मृत्यु भी प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में मानी जाएगी। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने राजस्व विभाग द्वारा मुआवजा देने से इनकार करने का आदेश निरस्त करते हुए मृतक के बेटे को 30 दिनों के भीतर 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।

Chhattisgarh Court News: लाख निकालते समय हुआ हादसा

मामला राजनांदगांव जिले के मोहला क्षेत्र का है। याचिका के अनुसार, 16 जुलाई 2020 को मोहला निवासी श्यामूराम मंडावी लाख निकालने के लिए पेड़ पर चढ़े थे। इसी दौरान अचानक तेज आंधी और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। खराब मौसम के कारण उनका संतुलन बिगड़ गया और वे पेड़ से नीचे गिर गए। गंभीर चोट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम सहित सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि हादसा प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण हुआ था।

राजस्व विभाग ने मुआवजा देने से किया इनकार

मृतक के परिजनों ने राज्य सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था। हालांकि, अतिरिक्त कलेक्टर ने यह कहते हुए मुआवजा देने से इनकार कर दिया कि यह मामला प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में नहीं आता। इस निर्णय से असंतुष्ट होकर मृतक के बेटे ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अतिरिक्त कलेक्टर के आदेश को चुनौती दी।

अति. कलेक्टर ने खारिज किया दावा

मृतक के बेटे अमर ने राज्य सरकार की प्राकृतिक आपदा राहत नीति के तहत चार लाख रुपए मुआवजे के लिए आवेदन किया। नायब तहसीलदार ने सभी दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा देने की अनुशंसा भी की, लेकिन अतिरिक्त कलेक्टर ने 1 फरवरी 2021 को यह कहते हुए दावा खारिज कर दिया कि पेड़ से गिरने से हुई मौत पर मुआवजे का प्रावधान नहीं है।

High Court Compensation Order: हाईकोर्ट ने पलटा प्रशासन का फैसला

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि हादसा तेज आंधी और बारिश जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों के दौरान हुआ था। इसलिए इसे प्राकृतिक आपदा से हुई मृत्यु माना जाएगा। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर मुआवजा नहीं रोका जा सकता कि व्यक्ति पेड़ पर चढ़ा हुआ था। कोर्ट ने अतिरिक्त कलेक्टर और राजस्व विभाग के आदेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि मृतक के बेटे को 30 दिनों के भीतर 4 लाख रुपये की अनुग्रह सहायता प्रदान की जाए।

भविष्य के मामलों के लिए भी अहम फैसला

कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण नजीर साबित हो सकता है। अब यदि कोई व्यक्ति आंधी, तूफान, तेज बारिश या अन्य प्राकृतिक परिस्थितियों के दौरान दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवाता है, तो उसके परिजनों को प्राकृतिक आपदा राहत योजना के तहत मुआवजा मिलने का रास्ता और स्पष्ट हो गया है। हाईकोर्ट के इस फैसले से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके मुआवजे के दावे प्राकृतिक आपदा की संकीर्ण व्याख्या के आधार पर खारिज कर दिए गए थे।

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