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आयुष्मान और खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति

Bilaspur News: प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व डॉ.खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना संचालित हैं, पर ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।

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Confusion among people regarding Ayushman Or Khubchand health scheme

आयुष्मान और खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति

बिलासपुर। Chhattisgarh News: प्रदेश में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना व डॉ.खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना संचालित हैं, पर ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसे लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति है कि दोनों योजनाओं के अलग-अलग हेल्थ कार्ड बनते होंगे। इसे लेकर आए दिन लोग अस्पतालों से लेकर सीएमएचओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। जबकि ऐसा नहीं है। एक आयुष्मान कार्ड से ही हितग्राहियों का इलाज होना है। दरअसल इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जागरुकता अभियान ही नहीं चलाया, जिससे लोगों को पता चल सके। यही वजह है कि लोग भ्रमित हैं।

इधर निजी अस्पतालों में सिजेरियन केस ही लिए जा रहे, लगातार शिकायत के बाद भी स्वास्थ्य अधिकारी कर रहे अनदेखी

छत्तीसगढ़ में पहले इलाज के मद्देनजर स्मार्ट कार्ड चलता था। बाद में केंद्र सरकार ने देश भर में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना शुरू की। इसके अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे वाले हितग्राहियों को 5 लाख रुपए तक इलाज सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त एपीएल श्रेणी वालों का 50 हजार रुपए तक का इलाज होता है। ये दोनों आयुष्मान कार्ड के माध्यम से ही हो रहा है। इस स्वास्थ्य योजना में छत्तीसगढ़ सरकार का भी राज्यांश होने के चलते डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना का नाम भी दिया गया है। लिहाजा ज्यादातर लोगों में भ्रम है कि जैसे आयुष्मान कार्ड बन रहा है, उसी तरह क्या डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना वाला कार्ड भी अलग से बन रहा होगा।

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अलग-अलग कार्ड के लिए लगा रहे चक्कर

आयुष्मान व डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना को लेकर लोग अब भी भ्रम की स्थिति में हैं। दोनों अलग-अलग योजनाएं हैं तो इसके अलग-अलग कार्ड भी होंगे, यह माना जा रहा है। लेकिन दोनों ही योजनाएं समाहित हैं। एक ही कार्ड से इलाज हो रहा है, यह प्रचार-प्रसार अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने नहीं किया है। यही वजह है कि लोग भ्रम में पड़ कर अलग-अलग कार्ड बनवाने अस्पतालों के काउंटर्स से लेकर सीएमएचओ कार्यालय तक पहुंच रहे हैं। जब यहां उन्हें हकीकत बताई जाती है, तब उल्टे पांव लौटना पड़ रहा।

निजी अस्पतालों में सिर्फ सिजेरियन इलाज को तवज्जो...

आयुष्मान योजना के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में तो इलाज हो ही रहा है, कुछ निजी अस्पतालों को भी इसकी मान्यता दी गई है। योजना अंतर्गत जिन अस्पतालों में जो इलाज सुविधाएं उपलब्ध हैं, उसके तहत इलाज करना है। जमीनी हकीकत ये है कि ज्यादातर निजी अस्पतालों में सिर्फ सिजेरियन केसेज ही लिए जा रहे हैं। जबकि उनके यहां योजनांतर्गत पैकेज वाले इलाज भी हो रहे हैं। सिजेरियन को छोड़ बाकी इलाज के लिए कार्ड मान्य नहीं किए जा रहे, यानी अगर इलाज कराना है तो अस्पताल की निर्धारित फीस ली जा रही है। इसे लेकर लगातार लोगों की शिकायत के बाद भी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं।

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दोनों योजनाएं आपस में समाहित

लोगों को जानकारी दी जा रही है कि दोनों योजनाएं आपस में समाहित हैं। निजी अस्पतालों में सिर्फ सिजेरियन केसेज ही लिए जा रहे या फिर पैकेज में शामिल इलाज सुविधा होने के बाद भी आनाकानी की जा रही है, इलाज कार्ड के माध्यम से न कर फीस ली जा रही, इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी संस्थानों पर कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेश शुक्ला, सीएमएचओ।

प्रदेश में सीएम विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना भी चल रही...

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना भी संचालित है। इसके अंतर्गत कैंसर जैसी बड़ी बीमारी के इलाज के लिए 25 लाख रुपए तक का इलाज हो रहा है, लेकिन इसके अंतर्गत इलाज कराने सीएम से अनुमोदन जरूरी है। इसका कार्ड नहीं बनता।

..बहुत से अस्पताल मरीजों को आकर्षित करने आयुष्मान योजना से जुड़े, पर इलाज में आनाकानी

जिले में बहुत से अस्पताल ऐसे भी हैं, जिन्होंने आयुष्मान योजना के लिए स्वास्थ्य विभाग में पंजीयन करा लिया है, पर इससे इलाज करने में आनाकानी कर रहे हैं। इलाज की बात पर पल्ला झाड़ते हुए फीस लगने की बात कही जा रही है।

जिले में 75 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना में शामिल, 11 लाख हितग्राही...

आयुष्मान योजना अंतर्गत सिम्स व जिला अस्पताल के अलावा जिले के 75 निजी अस्पतालों को शामिल किया गया है, जहां एपीएल व बीपीएल वर्ग के मरीज इलाज करा सकते हैं। जिले भर में 11 लाख हितग्राही हैं, जिन्हें इसका लाभ मिल रहा है।

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केस - 1. सरकंडा निवासी अनूप शर्मा रिंगरोड-2 स्थित एक निजी अस्पताल जहां यह कार्ड चलता है हार्ट की बीमारी का इलाज कराने गए, वहां उनके चेकअप के बाद बताया गया कि इसका इलाज स्वयं के खर्च से कराना पड़ेगा। आयुष्मान में इसका पैकेज शामिल होने की बात पर कहा गया कि सिजेरियन केस होता तो इससे इलाज करते। इस पर उन्हें उल्टे पांव लौटना पड़ा।

केस - 2. तोरवा निवासी सविता अवस्थी पुराना बस स्टैंड स्थिति एक निजी अस्पताल में पाइल्स का इलाज कराने गईं। उन्हें बताया गया कि इसका ऑपरेशन होगा। इस पर जब आयुष्मान कार्ड से करने की बात कही गई तो कहा गया कि उससे नहीं होगा, स्वयं के खर्च पर कराना होगा। पैकेज में शामिल होने की बात पर कहा गया कि इसमें पेंच है। लिहाजा उन्हें स्वयं के खर्च पर ऑपरेशन कराना पड़ा।

केस- 3. मंगला निवासी खेसराम कर्ष सीएमएचओ ऑफिस ये सोच कर पहुंचे कि आयुष्मान कार्ड तो बना ही है, खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना वाला भी कार्ड बनवा लें। वहां बताया गया कि आयुष्मान कार्ड में ही दोनों समाहित हैं। अब खेसराम भ्रमित लोगों को भी अपनी ओर से इस बात की जानकारी दे रहे हैं।

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