
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Photo Patrika)
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति को अपने निजी आवास में शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा आयोजित करने का अधिकार है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रार्थना सभा के लिए पहले से अनुमति लेना जरूरी नहीं है। सिंगल बेंच ने इस आदेश में पुलिस की ओर से जारी नोटिस को रद्द कर दिया, जिसमें थाना प्रभारी याचिकाकर्ताओं को प्रार्थना सभा रोकने के लिए बार-बार नोटिस दे रहे थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अनावश्यक परेशान नहीं किया जाए। यह मामला जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम गोधना से जुड़ा है। गोधना में याचिकाकर्ताओं ने अपने आवास की पहली मंजिल पर हॉल बनाया है। वर्ष 2016 से वहां ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है। इन सभाओं में किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या शांति भंग की शिकायत नहीं है।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने कोर्ट को बताया कि इसके बावजूद नवागढ़ थाने के थाना प्रभारी भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 94 के तहत बार-बार नोटिस जारी कर प्रार्थना सभा पर रोक लगाने का प्रयास कर रहे थे। साथ ही ग्राम पंचायत गोधना ने पहले जारी ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ को दबाव में वापस ले लिया। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत पुलिस के नोटिस को चुनौती दी गई थी और 7 दिसंबर 2025 को प्रार्थना नहीं करने संबंधी आदेश को रद्द करने के साथ अपने धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई।
सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और वे जेल भी जा चुके हैं। प्रार्थना सभा आयोजित करने के लिए सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी, इसलिए पुलिस ने नोटिस जारी किए। राज्य ने जवाब दाखिल करने के लिए भी समय मांगा।
दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने निजी मकान में 2016 से प्रार्थना सभा आयोजित कर रहे हैं और ऐसा करने पर कोई कानूनी प्रतिबंध नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि प्रार्थना सभा के दौरान शोर-शराबा, कानून-व्यवस्था की समस्या या किसी प्रकार का उल्लंघन होता है, तो संबंधित प्राधिकरण विधि के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन केवल प्रार्थना सभा आयोजित करने के आधार पर हस्तक्षेप उचित नहीं है।
Published on:
01 Apr 2026 12:38 pm
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