
शिक्षा बदल रही राह: रिसर्च और इनोवेशन के लिए भी मिल रहा करोड़ों का फंड
बिलासपुर। Chhattisgarh News: एक तरफ जहां दूसरे विश्वविद्यालयों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर व प्राध्यापकों की कमी है, वहीं दूसरी तरफ सीयू में शोध कार्य के लिए अब इंवेस्टमेंट शुरू हो गया है। गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के इंक्यूबेशन सेंटर को डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) ने निधि स्कीम के अंतर्गत 5 करोड़ के प्रोजेक्ट की स्वीकृति प्रदान की है। इधर वनस्पति विभाग शोध में बढ़ावा देने के लिए डीसटी ने 1.68 करोड़ के प्रोजेक्ट की अनुमति दी है।
विश्वविद्यालय के इन्क्यूबेशन सेंटर ने डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (डीएसटी) को निधि स्कीम के तहत प्रस्ताव बनाकर भेजा था, जिसे डीएसटी ने इंक्यूबेशन सेंटर के लिए 5 करोड़ के प्रोजेक्ट की स्वीकृति प्रदान कर दी है। तकनीकि के इस दौर में विद्यार्थियों को नए स्टार्टअप और उनकी योजनाओं के सपने को सच साबित करने के लिए तैयारी की जा रही है। जहां विद्यार्थी अपने आइडियाज इन सेंटर में शेयर करेंगे। इसके बाद अगर उनका आइडिया इन्क्यूबेशन सेंटर कमेटी इसका चयन करेगी तो उनके लिए 2 लाख रुपए से 10 लाख रुपए तक की प्रोत्साहन राशि का प्रावधान भी है। इससे उनके स्टार्टअप को शुरू करने में काफी सहयोग मिलेगा।
खास बात यह है कि उनका प्रोजेक्ट सेलेक्ट होने पर पेटेंट भी कराया जाएगा। कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने कहा कि इस प्रोजेक्ट में इन्क्यूबेशन सेंटर के इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के साथ-साथ छत्तीसगढ़ राज्य के स्टार्टअप के लिए कई तरह की योजना बनाई गई है, जिससे उन्हें प्रोत्साहन राशि के साथ प्रेरित किया जाएगा।
शोध कार्य के लिए उचित संसाधन कराए जाएंगे उपलब्ध
संभाग के अन्य विश्वविद्यालयों में शिक्षकों का जहां टोटा है, तो तकनीकी के दौर में कोई खास कार्य नहीं किए जा रहे हैं। वहीं अभी भी कई विश्वविद्यालय बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने से जूझ रहे है। वहीं सीयू शोध को गंभीरता से लेते हुए डीएसटी को प्रस्ताव बनाकर भेजा था, जिस पर वनस्पति विभाग के विभागाध्यक्ष व शिक्षकों को डीएसटी के द्वारा मिले 1 करोड़ 68 लाख के प्रोजेक्ट की अनुमति मिली है। इस प्रोजेक्ट से शोध के क्षेत्र में बेहतर काम करने व उचित संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके चलते शोध कार्य को बारीकी से करने में मदद मिलेगी। साथ ही वनस्पति विभाग में कुछ नया करने की योजना बनाई जा रही है।
इन कार्यों को दुरुस्त करने के लिए भी फंड
विश्विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों से संबंधित कई तरह के कार्य किए जा रहे हैं, जिसमें स्टार्टअप, उद्यमियों, छात्र-छात्राओं व शिक्षकों को ट्रेनिंग समेत विभिन्न प्रोग्राम किए जाते हैं। इन्हें और बेहतर तरीके से कराने के लिए भी इसमें राशि का प्रावधान है। इस मद में इन्क्यूबेशन सेंटर में विश्व स्तरीय प्रायोगिक सुविधाओं के विकसित करने के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है।
इंक्यूबेशन सेंटर के प्रोजेक्ट से विश्व स्तरीय सुविधाओं का विकास होगा। विश्वविद्यालय के सभी छात्र-छात्राएं इस सुविधा का लाभ लेकर अपने-अपने स्टार्टअप तैयार कर सकेंगे और भविष्य में स्वावलंबी बनकर देश के विकास में योगदान सुनिश्चित करेंगे। जबकि वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में राशि मिलने से अनुसंधान को बल मिलेगा। - प्रो. आलोक चक्रवाल, कुलपति, सीयू
Published on:
04 Nov 2023 03:30 pm
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