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60 तरुण भंतों को धम्म ज्ञान व बौद्ध संस्कारों की दी गई दीक्षा

प्रवज्या संस्कार एवं श्रामणेर शिविर 22 से 28 मई तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर समाजिक भवन, डॉ. अम्बेडकर नगर, बिलासपुर (छ.ग.) में आयोजित किया गया है। मुख्य प्रशिक्षक - भदन्त बुद्धघोष बोधी जी, प्रदेश अध्यक्ष बी.एस. 4 (छ.ग.) हैं।

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Dhamma knowledge and Buddhist rituals were given to 60 young devotees

Dhamma knowledge and Buddhist rituals were given to 60 young devotees

60 तरुण भंतों को धम्म ज्ञान व बौद्ध संस्कारों की दी गई दीक्षा
प्रवज्या संस्कार एवं श्रामणेर शिविर 22 से 28 मई तक डॉ. भीमराव अम्बेडकर समाजिक भवन, डॉ. अम्बेडकर नगर, बिलासपुर (छ.ग.) में आयोजित किया गया है। मुख्य प्रशिक्षक - भदन्त बुद्धघोष बोधी जी, प्रदेश अध्यक्ष बी.एस. 4 (छ.ग.) हैं। प्रवज्या संस्कार श्रामनेर शिविर के प्रथम दिवस में पूज्य भदंत बुद्ध घोष बोधि जी द्वारा 60 तरुण भंतों का प्रवज्या संस्कार कराया गया। यह शिविर पूज्य भदंत बुद्धघोष बोधि जी के आचार्यत्व में हो रहा है। शिविर में तथागत सम्यक संबुद्ध द्वारा दी हुई साधना तथा धम्म एवं बोधिसत्व बाबा साहेब अम्बेडकर के मिशन के बारे में भंते जी द्वारा मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है । ज्ञात हो, शिविर में प्रतिवर्ष प्रदेश के श्रद्धावान उपासक उपासिकाएं सैकड़ों की संख्या में भाग लेते रहे हैं। इस वर्ष भी शिविर में अधिक संख्या में भाग लेकर धम्म अमृत ग्रहण कर रहे हैं। प्रथम दिवस के प्रारंभ में सभी तरुण भंते चीवर धारण कर प्रवज्जित हुए। भंते जी ने अपनी धम्म देशना में बताया कि सभी बुद्धिस्ट देशों में इस महापर्व को उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
बुद्ध का चीवर धारण करना स्वयं के जीवन की एक ब?ी उपलब्धि है, हर किसी को इसका पूण्य लाभ नहीं मिलता। प्रशिक्षण के दौरान सभी तरुण भंते को बुद्ध के अतिमहत्वपूर्ण मार्ग पंचशील की शिक्षा दी गई।
संध्या के समय सभी भंते एवं उपासक उपसिकाओं द्वारा अम्बेडकर नगर में चारिका (भ्रमण) किया गया। धम्म देशना कार्यक्रम में भन्ते जी द्वारा देशना में कहा गया कि ***** धम्म न तो मूर्तियों में है और न ही छपी किताबों में, धम्म हमारे दिलों में और हमारे व्यवहार में निवास करता है। जब तक जिन्दा हैं तब तक किताबों को फाडऩे से कुछ नहीं होगा। किताब तो हम दोबारा भी छपवा लेंगे, मूर्तियां भी नयी बना लेंगे परन्तु यदि हम अपने आचरण और अपने हृदयों से धम्म को खो देंगे और किताबों व मूर्तियों को बचा लेंगे तो कोई लाभ नहीं होगा। जब केवल मूर्तियां और किताबें ही रह जाएगी, धम्म खो चुका होगा। उसके प्राण खो चुके होंगे। दोपहर का भोजन आयुष्मान विमलेश उके द्वारा संपन्न कराया गया।